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छत्तीसगढ़ में गरीबों के बीच बंटवाया राशन, बदले में अंग्रेजों से मिली फांसी की सजा

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी में महंत घासीदास संग्रहालय में श्रिया आर्ट द्वारा छत्तीसगढ़ के क्रांतिकारी शहीद वीर नारायण सिंह के जीवन पर आधारित नृत्य नाटिका का मंचन सोमवार को किया गया। नाटक में बताया कि वीर नारायण सिंह सोनाखान के जमींदार राम बिंसवार के पुत्र थे। वे धार्मिक, ज्ञानी, मिलनसार और परोपकारी थे। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा लगान लेने का विरोध किया था। लोगों के सुख-दुख का ध्यान रखे, अंग्रेजी शोषण के विरूद्ध लोगों को जागरुक करते। उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए अपना सैन्य संगठन भी तैयार किया।
1856 में पड़ा भयंकर अकाल
बात 1856 की है। इस साल भयंकर अकाल पड़ा, जनता भूख से मरने लगी। अंग्रेजों की मेहरबानी से जमाखोरी, ब्याज का धंधा आदि से व्यापारियों वर्ग भयंकर शोषण कर रहे थे। वीर नारायण ने साहूकार माखन को समझाया-तुम्हारे सामान की कीमत हम बाद में दे देंगे अभी सामान दे दो, लेकिन साहूकार नहीं माना। लोगों की भूख वीर नारायण सिंह सहन नहीं कर पाया और ताला तोड़कर साहूकार का सामान जनता के बीच बंटवा दिया। अंग्रेजों को वीर नारायण को पकड़ने का कारण मिल गया और वीर नारायण को फांसी की सजा दी गई।
इन लोगों ने निभाए पात्र
वीर नारायण सिंह रोल अनिकेत दास पंडा ने किया।
वीर नारायण की पत्नी की भूमिका भावना देवांगन ने निभाई।
मां का रोल यामिनी देवांगन ने किया।
बेटे का रोल हर्ष यादव ने किया।
नृत्यांगना – सेजल अहार, सिमरन गभने
साथी – हर्ष श्रवास्तव, राजा बिसेन, अभिषेक कामटकर
व्यापारी – अभिषेक कामटकर
सिपाही – कुंजल पाटिल
अंग्रेज – नयन देवांगन
तबला- शुभम भन्नेट, आर्गन- शेखर बघेल, गायन- विशाल यादव, ममता अहार।

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