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जीवन में एक ही गुरु बनाएं, जो आत्मा का कल्याण कर दे

रायपुर: जिस तेजी से लोगों का मन बदलता है, उसी तेजी से आज गुरु बदले जा रहे हैं। गुरु बनाने से पहले व्यक्ति को देखना चाहिए कि मैं जिन्हें गुरु बना रहा हूं क्या वे पंच महाव्रतों का पालन करते हैं। जीवन में एक ही गुरु बनाएं और ऐसा बनाएं जो अपने साथ आपकी आत्मा का भी कल्याण कर दे। यह संदेश टैगोर नगर स्थित श्री लालगंगा पटवा भवन में साध्वी मंगलप्रभा ने दिया।

साध्वीश्री ने कहा कि हम सालों से जिनवाणी सुन रहे हैं लेकिन हमारे भीतर कभी संयम के भाव नहीं आए, जबकि महाबल ने एक बार धर्म देशणा सुनकर ही श्रावक के 12 व्रत अंगीकार कर लिए। आगे चलकर दीक्षा भी ली। आत्मा का कल्याण करना है तो श्रावक के कर्तव्यों का पूरी तरह पालन करिए।

मां के आशीर्वाद से जीते श्रीराम

प्रवचन सभा में साध्वी दिव्यांशी ने कहा कि श्रीराम के पास कुछ नहीं था। सिर्फ मां का आशीर्वाद था। रावण के पास सब था, लेकिन मां का आशीर्वाद नहीं था। इसी वजह से राम की जीत हुई और रावण हार गए। हमें अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए। आजकल घुटने छूकर प्रणाम करने का चलन है जो बहुत गलत है। अपने से बड़ों के जब चरण स्पर्श करें, तो पैर का अंगूठा हमारा केंद्र बिंदु होना चाहिए।

जिन माता-पिता ने सक्षम बनाया, उन्हें आज नासमझ कहना खुद में सबसे बड़ी नासमझी है। माता-पिता ने जन्म दिया। शिक्षा आदि की व्यवस्था की और आपको आपके पैरों पर खड़ा किया। अब बारी आपकी है। बुढ़ापे में उनका सहारा बनें और अपने कर्तव्य का पालन करें। जो लोग माता-पिता का अपमान करते हैं, वे कहीं सम्मान नहीं पाते।

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