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चिंतन शिविर से चुनावी तैयारी का शंखनाद

जगदलपुर। बस्तर को भाजपा प्रदेश में सत्ता की कुंजी मानती है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बस्तर संभाग से भाजपा हमेशा कई सीटें जीतती रही है लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद वर्तमान में भाजपा का यहां से एक भी विधायक नहीं है। लगातार 15 साल तक प्रदेश की सत्ता में काबिज रहने के बाद वर्तमान में सत्ता से बाहर होकर विपक्ष की भूमिका निभा रही भाजपा ने 2023 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में जीत के लिए रणनीति तय करने के लिए बस्तर का चुना है। यह कहना है पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता केदार कश्यप का।

अगले सप्ताह 31 अगस्त से दो सितंबर तक जगदलपुर में आयोजित होने वाले पार्टी के चिंतन शिविर और संभागीय कार्यकर्ता सम्मेलन को लेकर गुरुवार को भाजपा कार्यालय में पत्रवार्ता लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश में अपने बड़े मिशन की शुरूआत बस्तर की अराध्य देवी मां दंतेश्वरी की धरा से करती आ रही है। राजनीतिक दृष्टि से भी बस्तर का प्रदेश की राजनीति में अहम स्थान है। चिंतन शिविर में पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकारी शामिल होंगे।

शिविर में आगामी विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस को प्रदेश की सत्ता से बाहर करने की रणनीति बनेगी। बस्तर सत्ता की कुंजी है। कांग्रेस ने जनता से झूठे वादे करके सत्ता हासिल की है। भाजपा कांग्रेस सरकार की नाकामियों और वादाखिलाफी को जनता तक पहुंचा रही है। आदिवासियों के साथ कांग्रेस ने हमेशा से छल किया है। चिंतन शिविर के बाद संभाग स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। कार्यकर्ताओं को अभी से चुनावी तैयारी में जुटने को कहा जा चुका है।

31 को दोपहर तक पहुंच जाएंगे पदाधिकारी

सम्मेलन में राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारी कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे। केदार कश्यप ने बताया कि 31 अगस्त को दोपहर तक चिंतन शिविर में शामिल होने वाले सभी पदाधिकारी पहुंच जाएंगे। पत्रवार्ता में भाजपा के प्रदेश महामंत्री नारायण चंदेल, किरण देव, भुपेंद्र सवन्नाी, प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य डा. सुभाऊ कश्यप, लच्छू कश्यप, कमलचंद भंजदेव, श्रीनिवासराव मद्दी, जिला अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, योगेंद्र पांडे, संजय पांडे, रामाश्रय सिंह, वेदप्रकाश पांडे, सुरेश गुप्ता, संग्राम सिंह राणा, आलोक अवस्थी आदि भी मौजूद थे।

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