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अंतरजातीय विवाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुरुष को प्रदान की सुरक्षा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक व्यक्ति को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान कर दी जिस पर आरोप है कि उसने एक महिला का अपहरण किया था। उस महिला ने अपने माता-पिता की इच्छा के खिलाफ आरोपित से शादी की थी। जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस अभय एस. ओका की पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी-पूर्व जमानत के लिए आरोपित व्यक्ति द्वारा दायर याचिका अप्रैल, 2021 से कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित है और उसके भरसक प्रयासों के बावजूद याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी है।

पीठ ने कहा कि आमतौर पर यदि गिरफ्तारी-पूर्व जमानत के लिए कोई याचिका हाई कोर्ट में लंबित होती है तो संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत इस अदालत के लिए याचिका में हस्तक्षेप करने का कोई अवसर नहीं है। पीठ ने कहा, ‘लेकिन हमारे संज्ञान में लाए गए तथ्यों को देखते हुए याचिकाकर्ता संख्या एक और दो ने शादी की है और इसके दस्तावेजी सुबूत रिकार्ड में हैं..’ अदालत ने कहा कि इस मामले के अजीबोगरीब तथ्यों, परिस्थितियों और रिकार्ड में मौजूद दस्तावेज को ध्यान में रखते हुए, उसकी राय है कि इस चरण में इस अदालत द्वारा व्यक्ति पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

पीठ ने कहा, ‘तदनुसार, हम निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता संख्या दो (पुरुष) को आइपीसी की धारा-365 के तहत दर्ज प्राथमिकी के संदर्भ में तीन महीने की अवधि के दौरान गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। हम हाई कोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह गिरफ्तारी-पूर्व जमानत के लिए आवेदन पर जल्द सुनवाई के आग्रह पर विचार करे।’ शीर्ष अदालत एक महिला और उसके पति द्वारा दायर संयुक्त याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें कहा गया था कि वे दोनों बालिग हैं और उन्होंने आठ दिसंबर, 2020 को शादी कर ली है। यह अंतरजातीय विवाह है, इसलिए माता-पिता को यह स्वीकार्य नहीं है।

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