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डोंगरगांव में लड़कियों का है एकमात्र स्कूल, इसे आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में कर दिया है तब्दील

बिलासपुर। राजनादगांव जिले के डोंगरगांव निवासी छात्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसढ़ हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के लिए कहा है। कोर्ट ने जवाब के लिए शासन को चार सप्ताह की मोहलत दी है। याचिकाकर्ता छात्रा का कहना है कि डोंगरगांव में लड़कियों की पढ़ाई के लिए एकमात्र हाई स्कूल है। राज्य शासन ने इसे आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में तब्दील कर दिया है। शासन के इस निर्णय से अध्ययन अध्यापन को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। छात्रा ने अपने वकील के जरिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। दायर याचिका में कहा है कि क्षेत्र के इकलौते कन्या विालय को स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में शासन ने बदल दिया है। कन्या हाई स्कूल में दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं के लिए छात्रावास की सुविधा भी मुहैया कराई गई है।

छात्राओं के अलावा पालकों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों से रायशुमारी किए बिना इसे अंग्रेजी माध्यम स्कूल बनाने से बेटियों की पढ़ाई प्रभावित होगी। याचिकाकर्ता छात्रा ने अपनी याचिका में कहा है कि जिस जगह पर कन्या शाला व छात्रावास संचालित की जा रही है उसी के समीप बालक स्कूल है। लड़कों के स्कूल में दर्ज संख्या भी काफी कम है।

बालक स्कूल को आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल में तब्दील करने के बजाय लड़कियों की ज्यादा दर्ज संख्या वाली कन्या हाई स्कूल को अंग्रेजी माध्यम स्कूल बना दिया है। मामले की सुनवाई कार्यकारी चीफ जस्टिस प्रशांत मिश्रा की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

शिक्षा के अधिकार अधिनियम का दिया हवाला

याचिकार्का छात्रा ने अपनी जनहित याचिका में केंद्र सरकार की योजना शिक्षा के अधिकार अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि राज्य शासन ने शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन किया है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के प्रभावी नारों को भी शासन के अफसर नजरअंदाज कर रहे हैं।

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