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छत्तीसगढ़ में चाय-काफी में बहुत अधिक हैं संभावनाएं

रायपुर: राज्य की 54 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में बड़़े पैमाने पर धान की खेती होने के कारण राज्य को धान का कटोरा कहा जाता है। प्राकृतिक संपदा से भरपूर प्रदेश में नदियां, जंगल, पहाड़ और पठार भी काफी भूभाग में हैं। इनमें पठारी भूमि में धान का उत्पादन नहीं हो पाने के कारण अर्थव्यवस्था में उनका योगदान सीमित हो गया था। इन सबके बावजूद जशपुर जिले के पठारी क्षेत्र में चाय और बस्तर में काफी की खेती ने संभावानाओं के नए द्वार खोले हैं। कृषि विज्ञानियों ने यहां की जलवायु के अध्ययन के आधार पर संभावनाओं को नई दिशा दी है।

सरकार की तरफ से टी-काफी बोर्ड गठन का फैसला इसी दिशा में अहम कदम है जिसके तहत अगले तीन वर्षो में 20 हजार एकड़ में चाय और काफी की खेती कराने का लक्ष्य तय किया गया है। जशपुर जिला में चाय की खेती सफलतापूर्वक की जा रही है। यहां सरकार ने जिला खनिज न्यास, वन विभाग, डेयरी विकास योजना और मनरेगा की योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करते हुए 80 एकड़़ भूमि में चाय बागान विकसित हो रहे हैं।

तीन साल बाद जब बागानों से चाय का उत्पादन शुरू होगा तो प्रति एकड़़ दो लाख रुपये सालाना तक का किसान लाभ कम सकेंगे। यह धान की खेती से कहीं अधिक लाभकारी साबित होगा। इसी तरह बस्तर केदरभा, ककालगुर और डिलमिली में काफी की खेती विकसित हो चुकी है। काफी उत्पादन केलिए समुद्र तल से 500 मीटर की ऊंचाई जरूरी है। बस्तर के कई इलाकों की ऊंचाई समुद्र तल से 600 मीटर से ज्यादा है जहां ढलान पर खेती के लिए जगह उपलब्ध है।

100 एकड़ जमीन में काफी उत्पादन का प्रयोग सफल रहा है तथा बस्तर काफी नाम से इसकी ब्रांडिंग भी हो रही है। उद्यानिकी विभाग किसानों को काफी उत्पादन का प्रशिक्षण भी दे रहा है। चाय-काफी की खेती की विशेषता यह है कि इसके लिए हर साल बीज नहीं डालना पड़़ता है। धान की तरह बहुत अधिक पानी की भी आवश्यकता नहीं पड़़ती। केवल देखभाल करने की आवश्यकता रहती है।

वनोपजों के मामले में प्रदेश काफी आगे है तथा पठारी क्षेत्रों में चाय-काफी के उत्पादन से ग्रामीणों के लिए रोजगार और अर्थोपाजन के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। सरकार की ओर से टी-काफी बोर्ड बनाने पहल को सही दिशा में उठाया गया कदम माना जा सकता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि कृषि विज्ञानियों के अध्ययन के आधार पर सरकार की तरफ से हुई इस पहल के सार्थक परिणाम सामने आएंगे और राज्य के किसानों और उद्यमियों की संपन्नता में चाय-काफी ताजगी लाने का काम करेगी।

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