ब्रेकिंग
शराब दुकान के खिलाफ तिलहरी में 'चक्काजाम'! सड़क पर डटे लोग, जबलपुर-मंडला रोड पर घंटों थमा रहा ट्रैफि... मैहर में रिश्तों का कत्ल! नशे के लिए दादी ने नहीं दिए पैसे, तो पोते ने ब्लेड से किया जानलेवा हमला। मध्य प्रदेश की चांदी! केंद्रीय टैक्स और ग्रांट से मिलेंगे हजारों करोड़, विकास कार्यों को मिलेगी नई र... रीवा को बड़ी सौगात: 200 बेड का अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल तैयार, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए ₹321 करोड़ ... छोटी काशी में सजा साहित्य का महाकुंभ: देश भर से जुटे दिग्गज साहित्यकार, हिंदी को वैश्विक मंच दिलाने ... खजुराहो में कोहराम: होटल का जहरीला खाना खाने से 5 कर्मचारियों की मौत, फूड सैंपल फेल होने पर 16 लाख क... ग्वालियर: यूनिवर्सिटी की एक चूक और छात्रों का सपना टूटा! क्रॉस कंट्री रेस की सूचना न मिलने से खिलाड़... अनोखी कलाकारी! पुराने सिक्कों और अनाज से उभरी निर्मला सीतारमण की छवि, अब ओल्ड क्वाइन्स म्यूजियम की उ... छिंदवाड़ा: परासिया नगर पालिका अध्यक्ष को BJP ने दिखाया बाहर का रास्ता, 6 साल के निष्कासन से सियासी ग... इंदौर मैराथन में मातम: फिनिशिंग लाइन से महज 100 मीटर पहले कोलकाता के युवक को आया कार्डियक अरेस्ट, हु...
देश

बेटी और बहू के बीच एसईसीएल प्रबंधन ने खींची लक्ष्मण रेखा, हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी

बिलासपुर। भू-विस्थापित परिवार को नौकरी देने के नाम पर एसईसीएल प्रबंधन बेटी और बहू के बीच लक्ष्मण रेखा खींच दी है। भू-विस्थापित ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है कि भूमि अधिग्रहण के एवज में उनकी बहुओं को नौकरी देने में एसईसीएल आनाकानी कर रहा है। मामले की सुनवाई जस्टिस पी सैम कोशी की सिंगल बेंच में हुई। प्रकरण की सुनवाई के बाद जस्टिस कोशी ने बेटी और बहुओं के बीच भेद करने को लेकर नाराजगी जताई है। साथ ही ऐसा न करने हिदायत भी दी है।

रायगढ़ जिले के दौलत राम ने वकील शिशिर दीक्षित के जरिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि कोल माइंस विस्तारीकरण योजना के तहत उनकी 32 एकड़ जमीन को एसईसीएल प्रबंधन ने अधिग्रहित कर लिया है। जमीन अधिग्रहण के एवज में केंद्र सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति के तहत मुआवजा और पुनर्वास नीति के तहत प्रभावित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देनी है।

याचिका के अनुसार उनकी 32 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है। पुनर्वास और अधिग्रहण नीति के तहत परिवार के 16 स्वजनों को नौकरी दी जानी है। चार बेटों को नौकरी देने की प्रक्रिया प्रबंधन ने प्रारंभ की है। याचिकाकर्ता ने कहा कि चार बेटों की नौकरी लगने के बाद भी 12 नौकरी उनके पास है। एसईसीएल प्रबंधन को पत्र लिखकर उन्होंने अपनी पढ़ी लिखी बहुओं को नौकरी देने की मांग की है।

इस पर प्रबंधन ने इन्कार कर दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस पी सैम कोशी की सिंगल बेंच में हुई। प्रकरण की सुनवाई के बाद जस्टिस कोशी ने एसईसीएल प्रबंधन के स्र्ख को लेकर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही कोर्ट ने निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता भू-विस्थापित को भू-अधिग्रहण व पुनर्वास नीति के तहत स्वजनों को नौकरी दी जाए।

कोर्ट ने प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह का व्यवहार भू-विस्थापितों के साथ नहीं हो इसका ध्यान रखा जाए। ऐसी शिकायत मिलने पर दोषी अधिकारियों व विभाग के खिलाफ जुर्माना ठोंकने की चेतावनी भी दी है।

Related Articles

Back to top button