बेटी और बहू के बीच एसईसीएल प्रबंधन ने खींची लक्ष्मण रेखा, हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी

बिलासपुर। भू-विस्थापित परिवार को नौकरी देने के नाम पर एसईसीएल प्रबंधन बेटी और बहू के बीच लक्ष्मण रेखा खींच दी है। भू-विस्थापित ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है कि भूमि अधिग्रहण के एवज में उनकी बहुओं को नौकरी देने में एसईसीएल आनाकानी कर रहा है। मामले की सुनवाई जस्टिस पी सैम कोशी की सिंगल बेंच में हुई। प्रकरण की सुनवाई के बाद जस्टिस कोशी ने बेटी और बहुओं के बीच भेद करने को लेकर नाराजगी जताई है। साथ ही ऐसा न करने हिदायत भी दी है।
रायगढ़ जिले के दौलत राम ने वकील शिशिर दीक्षित के जरिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि कोल माइंस विस्तारीकरण योजना के तहत उनकी 32 एकड़ जमीन को एसईसीएल प्रबंधन ने अधिग्रहित कर लिया है। जमीन अधिग्रहण के एवज में केंद्र सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति के तहत मुआवजा और पुनर्वास नीति के तहत प्रभावित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देनी है।
याचिका के अनुसार उनकी 32 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है। पुनर्वास और अधिग्रहण नीति के तहत परिवार के 16 स्वजनों को नौकरी दी जानी है। चार बेटों को नौकरी देने की प्रक्रिया प्रबंधन ने प्रारंभ की है। याचिकाकर्ता ने कहा कि चार बेटों की नौकरी लगने के बाद भी 12 नौकरी उनके पास है। एसईसीएल प्रबंधन को पत्र लिखकर उन्होंने अपनी पढ़ी लिखी बहुओं को नौकरी देने की मांग की है।
इस पर प्रबंधन ने इन्कार कर दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस पी सैम कोशी की सिंगल बेंच में हुई। प्रकरण की सुनवाई के बाद जस्टिस कोशी ने एसईसीएल प्रबंधन के स्र्ख को लेकर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही कोर्ट ने निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता भू-विस्थापित को भू-अधिग्रहण व पुनर्वास नीति के तहत स्वजनों को नौकरी दी जाए।
कोर्ट ने प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह का व्यवहार भू-विस्थापितों के साथ नहीं हो इसका ध्यान रखा जाए। ऐसी शिकायत मिलने पर दोषी अधिकारियों व विभाग के खिलाफ जुर्माना ठोंकने की चेतावनी भी दी है।






