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आखिर कौन है साद रिजवी ? जिसकी गिरफ्तारी के कारण जल उठा पाक, क्‍या है इसका फ्रांस कनेक्‍शन

नई दिल्‍ली। पाक‍िस्‍तान में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी ) पर प्रतिबंध और उसके चीफ मौलाना साद हुसैन रिजवी की गिरफ्तारी पर शुरू हुआ बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस विवाद ने उग्र रूप अख्तियार कर लिया है। महज चार वर्ष पूर्व वजूद में आए संगठन पर इमरान सरकार की कार्रवाई के नतीजे बेहद खराब दिखे। मौलाना साद की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्‍तान में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। इसके चलते कई शहर बुरी तरह से प्रभावित हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान छह लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। पाकिस्‍तान में चार घंटे तक इंटरनेट और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाना पड़ा। इसके अलावा ट्विटर, फेसबुक, वाट्सएप, यूट्यूब, टेलीग्राम और टिकटाक जैसे सोशल प्लेटफार्म पर भी कड़ा पहरा है। आखिर कौन है साद हुसैन ? क्‍या है इसका आतंकवादी कनेक्‍शन ? क्‍या है पाक‍िस्‍तान सरकार की बड़ी चिंता ?

वर्ष 2017 में खादिम हुसैन रिजवी ने रखी बुनियाद

टीएलपी पाकिस्तान में सक्रिय एक इस्‍लामिक कट्टरपंथी संगठन है। वर्ष 2017 में खादिम हुसैन रिजवी ने इसकी स्थापना की थी। वह धार्मिक विभाग का कर्मचारी और एक मस्जिद का मौलवी था। खादिम खुद को पैगंबर इस्लाम का चौकीदार कहता था। टीएलपी की स्थापना की बुनियाद धार्मिक कट्टरता और घृणा पर टिकी है। वर्ष 2011 में पकिस्तान में चर्चित मामला सामने आया था, जिसमें पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या उनके पुलिस गार्ड मुमताज कादरी ने कर दी थी। सलमान की हत्या की वजह सिर्फ यह थी कि वह पाकिस्तान में ईश निंदा कानून का विरोध कर रहे थे। खादिम हुसैन ने मुमताज कादरी का खुलकर समर्थन किया था। इसकी वजह से उसे अपनी सरकारी नौकरी भी गंवानी पड़ी थी। कादरी को बचाने के लिए वर्ष 2016 में उसने बिना अनुमति के रैली की शुरुआत की।

तहरीक-ए-लब्बैक का सियासत में दखल

कादरी के फांसी के बाद खादिम पाकिस्तान में मशहूर होता गया। इसके बाद उसने तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान या रसूल अल्लाह बनाने की घोषणा की। कट्टरपंथी विचारधारा की वजह से कुछ ही समय में टीएलपी का पाकिस्‍तान में मजबूत आधार बन गया। पार्टी के पोस्टरों में उन लोगों को दिखाया गया, जिन्हें ईशनिंदा के नाम पर पाकिस्तान में कादरी को निर्ममता से मार डाला था। टीएलपी ने पाक‍िस्‍तान के आम चुनाव में भी हिस्‍सा लिया। इस चुनाव में उसके संगठन को मामूली सफलता मिली। बावजूद इसके धर्म के नाम पर टीएलपी के आंदोलनों का दबाव सरकार और दूसरी पार्टियों पर साफ दिखने लगा। पिछले वर्ष 2020 में बीमारी के बाद 55 साल की उम्र में खादिम की मौत हो गई थी।

फ्रांस विरोध के चलते सुर्खियों में आया मौलाना साद

पिता खादिम की मौत के बाद इसी मुद्दे पर मौलाना साद ने अपनी पकड़ मजबूत की। फ्रांस के साथ कूटनीतिक रिश्ते समाप्‍त करने पर अड़ी पार्टी की मांग के आगे तब इमरान खान को झुकना पड़ा था। इमरान ने अप्रैल, 2021 की समय-सीमा को लेकर संसद में प्रस्ताव लाने की बात भी मान ली थी। मगर इस साल समय-सीमा से पहले ही 12 अप्रैल को इमरान सरकार ने मौलाना साद को गिरफ्तार कर उसके संगठन को प्रतिबंधित कर दिया। इसी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान में बवाल शुरू हुआ है। इसके आगे भी जारी रहने की आशंका जताई जा रही है।

आखिर क्‍या है पूरा मामला

बता दें कि टीएलपी के कार्यकर्ताओं ने पिछले हफ्ते लाहौर से इस्लामाबाद तक रैली निकालकर पाकिस्तान सरकार से अपने नेता साद रिजवी की रिहाई की मांग की थी। इसे पिछले वर्ष फ्रांस के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। फ्रांस की एक पत्रिका ने पैगंबर मोहम्मद के कार्टून प्रकाशित किए थे, जिसके खिलाफ उसने पिछले वर्ष प्रदर्शन किए थे। टीएलपी का मानना है कि ये ईशनिंदा के तहत आता है। इस संगठन की मांग है कि फ्रांस से आयातित सामान पर प्रतिबंध लगे और फ्रांस के राजदूत को देश से बाहर निकाला जाए। उधर, धार्मिक मामलों एवं अंतरधार्मिक सौहार्द मामलों के मंत्री पीर नूर-उल-हक कादरी ने कहा कि पाकिस्तान की सरकार और टीएलपी के बीच वार्ताकार के तौर पर काम करने के लिए 12 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।

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