ब्रेकिंग
Operation Sankalp to Urja Suraksha: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारतीय नौसेना का सबसे खतरनाक और बड़ा रेस... Delhi Terror Plot: पाकिस्तान से रची जा रही दिल्ली दहलाने की साजिश; ISI समर्थित TTH मॉड्यूल के 8 आतंक... Manipur Encounter: भारतीय सेना और असम राइफल्स की बड़ी कार्रवाई; चुराचांदपुर में UKNA उग्रवादी ढेर India-USA Relations: गृह मंत्री अमित शाह और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की बैठक; आतंकवाद और ड्रग्स तस... NEET Paper Leak News: 'पेपर लीक रोकने के उपाय या कॉमेडी सर्कस?' नीट विवाद पर केजरीवाल का केंद्र सरका... Doctor Kills Domestic Help: दिल्ली के पॉश इलाके में सनसनी; डॉक्टर के घर काम करने वाली महिला की हत्या... Shiv Sena UBT Crisis: उद्धव ठाकरे की बैठक से 6 सांसद नदारद; क्या टूटने वाली है शिवसेना UBT? जानें का... Bihar Heli Tourism: पटना से अब राजगीर, कैमूर और वाल्मीकिनगर तक होगी हवाई यात्रा; जानें किराया और पर्... Ranchi Police Encounter: आरएसएस कार्यालय हमला केस का मुख्य आरोपी घायल; हथियार छीनकर भागने की कोशिश म... MP Archaeological Survey: पुजारी के निजी संग्रह से मिला झांसी रियासत का बैज और दुर्लभ सामूहिक चित्र;...
देश

दिल्ली मंडल के इन स्टेशनों पर ट्रेनों के आने-जाने के बारे में मिलेगी एकदम सटीक जानकारी, जानिए क्या है योजना?

नई दिल्ली। ट्रेनों के परिचालन में सुधार और यात्रियों को सटीक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए रेलवे स्टेशनों पर कंट्रोल आफिस एप्लिकेशन (सीओए) डेटा लागर लगाए जा रहे हैं। इससे किसी ट्रेन के आने-जाने का समय आनलाइन दर्ज हो जाता है। इसमें मानवीय फेरबदल संभव नहीं होता है। दिल्ली मंडल के कई स्टेशनों पर यह सुविधा उपलब्ध हो गई है। आने वाले दिनों में अन्य स्टेशनों पर डेटा लागर लगाए जाएंगे

दिल्ली मंडल के 15 स्टेशनों पर है यह सुविधाः-

नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, आनंद विहार टर्मिनल, हजरत निजामुद्दीन, तिलक ब्रिज, गाजियबाद, पलवल, जाखल, चिपियाना बुजुर्ग, मेरठ सिटी, टपरी, कटार सिंहवाला, रोहतक रेलवे स्टेशन पर यह सुविधा उपलब्ध हो गई थी। हाल ही में कुरुक्षेत्र और पानीपत में भी डेटा लागर काम करने लगा है।

इस तरह काम करती है यह प्रणालीः-

रेल पटरी पर एक्सल काउंटर नाम का यंत्र लगाया जाता है। अंडर ग्राउंड तार के जरिये यह यंत्र पास के कंट्रोल रूम में लगी हुई दो मशीनों से जुड़ा रहता है। इस यंत्र से ट्रेन के गुजरने की जानकारी कंट्रोल रूम की मशीन में दर्ज हो जाती है। स्टेशन मास्टर व अन्य संबंधित अधिकारी भी आनलाइन इसे देख सकते हैं। पहले किसी ट्रेन के गुजरने की सूचना टेलीफोन से दी जाती थी और रजिस्टर में समय दर्ज किया जाता था। बेहतर रिकार्ड दिखाने के लिए समय दर्ज करने में गड़बड़ी की जाती थी, जिससे यात्रियों को आनलाइन या पूछताछ नंबर पर काल करने से ट्रेनों की सही स्थिति का पता नहीं चलता था। अब ट्रेनों के समय के साथ छेड़छाड़ संभव नहीं है।

रेल संचालन प्रबंधन में मददः-

डेटा लागर से ट्रेन की सटीक जानकारी मिलने के साथ ही स्वचालित ट्रेन प्रबंधन, स्वचालित सावधानी आदेश का पालन, त्रुटि रहित रिपोर्ट तैयार करने और मानवीय त्रुटि को कम करने में मदद मिलती है। इस तकनीक के उपयोग से सभी रेल मंडल पर समयपालन में वास्तविक सुधार करने का दबाव है।

दिल्ली के मंडल रेल प्रबंधक डिंपी गर्ग का कहना है कि राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली (एनटीईएस) के साथ सीओए का एकीकरण किया गया है। इससे ट्रेनों का वास्तविक समय अपडेट संभव हो सका है।

Related Articles

Back to top button