परिवारों के जीवन का मंत्र देशार्चन, सद्भाव और अनुशासन होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंडराजनीति By Khabar Top Desk On Mar 5, 2023 77 बरेली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने भारतीय पारिवारिक व्यवस्था को श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि परिवारों में एकता और राष्ट्रीयता की भावना जाग्रत होने पर राष्ट्र शक्तिशाली बनेगा. वास्तव में कुटुम्ब ही समाज की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इकाई है. संघ कुटुम्ब प्रबोधन के माध्यम से समाज के बीच बेहतर तालमेल, परस्पर सहयोग और सौहार्द कायम करने का प्रयास करके समाज और देश को मजबूत करने का प्रयास करता रहा है. महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय के अटल सभागार में आयोजित कार्यकर्ता परिवार मिलन कार्यक्रम में सरसंघचालक जी ने कहा कि व्यक्ति को सबसे पहले संस्कार अपने परिवार से ही मिलते हैं. समाज को सुसंस्कृत, चरित्रवान, राष्ट्र के प्रति समर्पित और अनुशासित बनाने में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका है. इसलिए संघ का प्रयास है कि स्वयंसेवकों के परिवारों को भारतीय संस्कृति की मूल अवधारणाओं से जोड़कर समाज को सशक्त बनाया जाए. लोगों को अपनी परम्पराओं और संस्कृति से जुड़े रहने के लिए अपनी मूल भाषा, भूषा, भजन, भवन, भ्रमण और भोजन को अपनाना होगा. 77 Share