ब्रेकिंग
Balod News: कबीरधाम में भारतीय किसान संघ का उग्र प्रदर्शन, 23 सूत्रीय मांगों को लेकर ट्रैक्टरों से क... Chhattisgarh Industrial Fire: भिलाई की फैक्ट्री में कैमिकल ड्रम फटने से लगी आग, बाल-बाल बचे मजदूर Raipur News: शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम में भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 सीरीज, प्रशासन ने पूरी की... Chhattisgarh News: तेलीबांधा चौक के नाम परिवर्तन को लेकर सीएम साय का बयान, 'सेवा ज्योति संकल्प' के त... Bastar Development News: सहकारिता मॉडल पर चर्चा के लिए बस्तर पहुंचे विभिन्न राज्यों के सहकारिता सचिव... Nana Patekar Demise: पद्म श्री पुरस्कार विजेता मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन... Kisan Andolan Chhattisgarh: धान के बढ़े दाम और बकाया भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने निकाली ट्रैक्... Dantewada News: दंतेश्वरी मंदिर में नवरात्रि दुकान आवंटन को लेकर व्यापारियों का विरोध, सड़क पर जगह म... Chhattisgarh Crime News: कमिश्नरेट पुलिस ने जब्त किया 1 क्विंटल 27 किलो गांजा, एनडीपीएस एक्ट के तहत ... Cyber Crime Ranchi: APK फाइल डाउनलोड कराकर बैंक खाता खाली करने वाला शातिर गिरोह सक्रिय, FIR दर्ज
लाइफ स्टाइल

सुकून की तलाश है तो बेस्‍ट टूरिज्‍म विलेज जरूर करें विजिट

रोज-रोज की टेंशन और शोरशराबे से दूर किसी शांत इलाके में जाने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो इस बार किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर नहीं, ​बल्कि गांव की तरफ रुख कीजिए. जी हां, हम जिन गांवों की बात कर रहे हैं, वो कोई साधारण गांव नहीं हैं, इन्हें विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त हो चुकी है. हम बात कर रहे हैं तेलंगाना के पोचमपल्ली , मेघालय के कोंगथोंग गांव  और मध्य प्रदेश के लाधपुरा खास गांव  के बारे में. बीते वर्ष इन तीनों गांवों को यूनाइटेड नेशन्‍स वर्ल्‍ड टूरिज्‍म ऑर्गेनाइजेशन अवॉर्ड के लिए बेस्‍ट टूरिज्‍म विलेज की कैटेगरी में नॉमिनेट किया जा चुका है.

पोचमपल्‍ली गांव  :  हैदराबाद से लगभग 40 किलोमीटर दूर तेलंगाना के नलगोंडा जिले का पोचमपल्‍ली गांव अपनी बुनाई शैली और इकत साड़ियों के लिए जाना जाता है. पोचमपल्ली को रेशम का शहर माना जाता है इसलिए ये गांव सिल्‍क सिटी के नाम से भी विख्यात है. इस गांव में 10 हजार हरकरघे हैं. यहां की साड़ि‍यां भारत समेत श्रीलंका, मलेशिया, दुबई, यूरोप और फ्रांस समेत कई देशों में भेजी जाती हैं.

 कोंगथोंग गांव  :  शिलॉन्ग से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित कोंगथोंग गांव अपने प्राकृतिक सौंदर्य और विशिष्ट संस्कृति के लिए बहुत लोकप्रिय है. सुंदर पहाड़ों, झरनों और देवदार के पेड़ों से घिरी घाटी की प्राकृतिक सुंदरता के अलावा कोंगथोंग में एक अजीबोगरीब प्रथा है. यहां बच्चे का नाम नहीं रखा जाता. जन्म के समय मां के दिल से जो भी धुन निकलती है, वो धुन उसे सौंप दी जाती है. जीवनभर उस बच्चे को उसी धुन से पुकारा जाता है. गांव में बातें कम और धुनें अधिक सुनाई देती हैं. इस कारण से गांव को ‘व्हिस्लिंग विलेज’ के नाम से भी जाना जाता है.

लाधपुरा खास गांव  : लाधपुरा खास गांव मध्य प्रदेश टीकमगढ़ जिले की ओरछा तहसील में है. ओरछा आने वाले पर्यटक जब इस गांव की तरफ बढ़ते हैं, तो एक अलग ही वातावरण देखने को मिलता है. यहां का शांत, शुद्ध और प्राकृतिक वातावरण लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. इस क्षेत्र में बुंदेलखंड के प्राचीन साम्राज्य और अवशेषों के बारे में जानकारी मिलती है. साथ ही पारंपरिक खान-पान और पहनावे से यहां की संस्कृति से भी परिचय होता है.

Related Articles

Back to top button