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मध्यप्रदेश

अच्छे उद्देश्यों के लिये हो सिविल सोसायटी संगठनों और सरकार बीच सहयोग

भोपाल : सतत विकास में भागीदारी एवं अनुभवों को साझा करने के लिये स्वयंसेवी संस्थाओं के सम्मेलन-सत्र “फेसिलिटेटिंग पार्टनरशिप्स : एक्सप्लोरिंग कॉलेबोरेशन्स एण्ड कन्वरजेंसेस” की अध्यक्षता करते हुए सीईओ अजीम प्रेमजी फाउंडेशन श्री अनुराग बेहर ने कहा कि सिविल सोसायटी संगठनों और सरकार के बीच सहयोग अच्छे उद्देश्यों के लिये होना चाहिए। इस तरह का सहयोग संगठनों के बीच भी होना चाहिए।

रिस्पेक्ट, कंटीन्यूटी एंड फ्लेसीबिलिटि

श्री बेहर ने कहा कि संगठनों का उद्देश्य साफ हो और उनके पास बेहतर एक्सपर्टीज होना चाहिए। यथासंभव सरकार से आर्थिक सहयोग की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। रिस्पेक्ट, कंटीन्यूटी एंड फ्लेसीबिलिटि होना जरूरी है। सिविल सोसायटी संगठनों को हर स्तर पर सम्मान मिले, कार्यों में निरंतरता हो और लचीलापन हर स्तर पर जरूरी है।

अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री लोकेश शर्मा ने सत्र का संचालन करते हुए कहा कि सहभागिता कहाँ से और कौन शुरू करे, इस पर गहन विचार-विमर्श होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन्हीं विषयों पर मंथन के लिये यह सम्मेलन किया गया है। श्री शर्मा ने कहा कि सहयोग को परिभाषित करना महत्वपूर्ण है, जिससे सरकार, नागरिक, समाज, समुदाय आदि की भूमिका के बारे में स्पष्ट दृष्टि बन सके। भारत रूरल लाइवलीहुड फंड के सीईओ श्री सी. प्रमथेश अम्बास्ता ने कहा कि केपेसिटी गेप को दूर करना जरूरी है। जब तक इसे दूर नहीं किया जाएगा, तब तक निचले स्तर पर समुचित सामाजिक और आर्थिक विकास नहीं होगा।

ह्यूँन ही बान ने की चाइल्ड बजट की सराहना

चीफ सोशल पॉलिसी यूनीसेफ नई दिल्ली सुश्री ह्यूँन ही बान ने कहा कि सिविल सोसायटी संगठनों ने कोरोना टीकाकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना और इस वर्ष प्रस्तुत किये गये चाइल्ड बजट की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह अनुकरणीय और उल्लेखनीय है।

मनी से ज्यादा मोबलाइजेशन जरूरी

कंट्री मेनेजर सीबीएम इंडिया ट्रस्ट श्री उमेश बौराई ने कहा कि मनी से ज्यादा मोबलाइजेशन जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में स्थापित संस्थाओं के साथ ही निचले स्तर पर कार्य कर रहे छोटे-छोटे एनजीओ को भी अवसर देना जरूरी है। सरकारी संस्थानों और शिक्षाविदों को छोटे एनजीओ के कार्य को हाईलाइट करना चाहिए। इनके सामाजिक कार्यकर्ताओं की सफलता की कहानियों को हर स्तर पर प्रदर्शित किया जाए। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था मध्यप्रदेश में 2500 किसानों के साथ कार्य कर रही है, जिनमें से लगभग 1500 किसान दिव्यांग हैं। इनके द्वारा 1200 हेक्टेयर में जैविक खेती की जाती है। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार के पंचायत एप की सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी पारदर्शिता किसी अन्य एप में नहीं है। इसमें पंचायत के हर खर्च की जानकारी उपलब्ध है। श्री बौराई ने बताया कि पूरे देश में 5 लाख किसानों के साथ लगभग 3 हजार हेक्टेयर भूमि पर कृषि संबंधित कार्य कर रहे हैं।

स्थानीयता का दें स्वयत्तता

को-फाउंडर ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन श्री अनीश कुमार ने कहा कि स्थानीयता का स्वयत्तता दें, इससे सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने बताया कि बड़वानी जिले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिलकर जनजातीय वर्ग के बीच काम कर रहे हैं। श्री कुमार ने बताया कि कन्वर्जेंस मिस्टर इंडिया की तरह है, जो कभी दिखता है और कभी नहीं।

पिपुल और पॉलिसीमेकर्स के बीच बने ब्रिज

फाउंडर इंडिया फाउंडेशन एंड डेव्हलपमेंट अल्टरनेटिव ले.ज. श्री अरूण साहनी ने कहा कि हमेशा पीपुल और पॉलिसीमेकर्स के बीच ब्रिज बने। पहले समस्या और फिर उसका हल ढूँढें और इसके बाद समस्या हल करने के लिये प्लेटफार्म। गेप को चिन्हित कर उसे दूर करें और गरीबों की उन्नति की आवाज बनें। एक-दूसरे की सोच की सराहना करें और नवाचरों को साझा करें।

सम्मेलन में शामिल स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों की शंकाओं का समाधान भी किया गया। झाबुआ से आये एक प्रतिभागी ने कहा कि समझाने की बजाय समझने की भी कोशिश होना चाहिए।

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