ब्रेकिंग
अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामला: CCTV में कैद हुआ आरोपियों का 'प्लान', 40 दिन में की 70 बार चोरी राज नगर एक्सटेंशन में मौत का रहस्य: पार्टी के दौरान बालकनी से गिरा युवक, पुलिस ने दोस्तों को लिया हि... मुरादाबाद में बड़ा साइबर फ्रॉड गिरोह गिरफ्तार: 'ऑपरेशन Cy-वज्र' के तहत पुलिस ने किया बड़ा खुलासा गाजियाबाद हैवानियत: मासूम बच्ची के मर्डर केस में बड़ा खुलासा, आवारा कुत्ते ने ढूंढ निकाला शव Moradabad Stunt Video: बारिश में चलती स्कूटी पर खड़ा होकर डांस, पुलिस कर रही वाहन नंबर से पहचान छतरपुर हत्याकांड: जंगल में मिला युवक का शव, गला घोंटकर की गई हत्या; पत्नी पर साजिश का आरोप Girija Raut Case: बहू ने विनायक राउत के परिवार पर लगाए सनसनीखेज आरोप, तांत्रिक फिरोज शेख गिरफ्तार ट्विशा शर्मा केस: एम्स दिल्ली की फॉरेंसिक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, गर्दन के निशानों से मेल खाती है 'ज... Political News: मंत्री और मुख्यमंत्रियों के लिए सख्त कानून की तैयारी, 30 दिन जेल का मतलब कुर्सी से छ... Uttarakhand Weather Update: पहाड़ों पर 'आसमानी आफत', भूस्खलन के कारण फंसे पर्यटक; जानें क्या है स्थि...
धार्मिक

ईश्वर का स्वरूप क्या है?

पहले अपने स्वरूप को जानों
एक महात्मा से किसी ने पूछा- ‘ईश्वर का स्वरूप क्या है?’
महात्मा ने उसी से पूछ दिया-‘तुम अपना स्वरूप जानते हो?’
वह बोला- ‘नहीं जानता।’
तब महात्मा ने कहा- ‘अपने स्वरूप को जानते नहीं जो साढ़े तीन हाथ के शरीर में ‘मैं-मैं कर रहा है और संपूर्ण विश्व के अधिष्ठान परमात्मा को जानने चले हो। पहले अपने को जान लो, तब परमात्मा को तुरंत जान जाओगे।  एक व्यक्ति एक वस्तु को दूरबीन से देख रहा है। यदि उसे यह नहीं ज्ञान है कि वह यंत्र वस्तु का आकार कितना बड़ा करके दिखलाता है, तो उसे वस्तु का आकार कितना बड़ा करके दिखलाता है, तो उसे वस्तु के सही स्वरूप का ज्ञान कैसे होगा?
अत: अपने यंत्र के विषय में पहले जानना आवश्यक है। हमारा ज्ञान इन्द्रियों के द्वारा संसार दिखलाता है। हम यह नहीं जानते कि वह दिखाने वाला हमें यह संसार यथावत्? ही दिखलाता है या घटा-बढ़ाकर या विकृत करके दिखलाता है।  गुलाब को नेत्र कहते हैं- ‘यह गुलाबी है।’ नासिका कहती है- ‘यह इसमें एक प्रिय सुगंध है।’ त्वचा कहती है- ‘यह कोमल और शीतल है।’ चखने पर मालूम पड़ेगा कि इसका स्वाद कैसा है। पूरी बात कोई इंद्री नहीं बतलाती। सब इन्द्रियां मिलकर भी वस्तु के पूरे स्वभाव को नहीं बतला पातीं।

Related Articles

Back to top button