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दिल्ली-NCR में पहले दिन जमकर टूटे प्रदूषण रोकने के नियम, राजधानी की हवा ‘बेहद खराब’

नई दिल्लीः दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई इलाकों में बुधवार सुबह वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में रही और 10 माइक्रोमीटर से कम व्यास के पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण रहे। दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) (299) भी ‘बहुत खराब’ स्तर पर पहुंच गया है। यह मंगलवार को शाम चार बजे तक 270 था। केंद्र द्वारा संचालित वायु गुणवत्ता एवं मौसम पूर्वानुमान प्रणाली और अनुसंधान (सफर) ने मंगलवार को पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने की घटनाएं बढ़ती देखी थी। इतना ही नहीं मंगलवार को कूड़ा जलाना और जेनरेटरों पर बैन लागू हुआ लेकिन ऐक्शन के बावजूद दिल्ली और एनसीआर में इन नियमों का पालन नहीं हुआ।

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सड़कों पर मैन्युअल झाड़ू लगी, कई जगहों पर कूड़े में आग लगाई गई, सोसायटियों व दुकानों पर जेनरेटरों का धुआं भी उड़ा। कंस्ट्रक्शन साइटों पर भी रोज की तरह धूल उड़ती दिखाई दी। बता दें कि दिल्ली सरकार ने नासा से मिली तस्वीरें और आंकड़े भी साझा किए थे जिसमें दिल्ली के आस-पास के इलाकों में बड़े स्तर पर पराली जलती दिखाई गई है।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री कैलाश गहलोत ने केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री हर्षवर्धन को पत्र लिखकर ‘सफर’ के आंकड़ों तक पहुंच मुहैया कराने का आग्रह किया है, ताकि प्रशासन वायु प्रदूषण को रोकने के लिए तत्काल सुधारात्मक उपाय कर सके। इससे पहले, पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) ने कहा था कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में प्रदूषण के स्थानीय स्रोत खराब वायु गुणवत्ता के मुख्य कारण हैं।

एक नजर दिल्ली के (AQIपरः

  • मुंडका 368,
  • द्वारका सेक्टर 8 में 362,
  • दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में 355,
  • आनंद विहार में 328,
  • वजीरपुर में 323,
  • रोहिणी में 323,
  • बवाना में 320,
  • अशोक विहार में 319,
  • नेहरू नगर में 319 और जहांगीरपुरी में 318 रहा।

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