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मध्यप्रदेश

महात्मा तुलसीदास न होते तो न चोटी होती, न बेटी होती, देश भी स्वतंत्र नहीं होता : जगद्गुरु रामभद्राचार्य

भोपाल ।  जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने कहा है कि गोस्वामी तुलसीदास जी नहीं होते, तो न हमारी चोटी होती, न हमारी रोटी होती और न ही हमारी बेटी होती। देश भी स्वतंत्र नहीं होता। देश को आजादी दिलाने वाले महात्मा गांधी ने भी तो रामचरितमानस से ही ‘रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम’ गाया था। भारत के चार व्यक्तियों में से एक के हिसाब से रामचिरतमानस मौजूद है। सभी संकल्प लें कि एकजुट होकर रामचरितमानस को संसद के दोनों सदनों में बहुमत से पारित कराकर राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कराकर रहेंगे। महाराजश्री भेल के दशहरा मैदान में चल रही रामकथा के दूसरे दिन धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में 192 देश हैं। इन सभी देशों में रामचरितमानस को पढ़ा और गाया जाता है। रामचरितमानस जैसा राष्ट्र का ग्रंथ कोई भी नहीं है। अब तक गीता प्रकाशन ने एक अरब रामचरितमानस छापी है। यानी कि प्रत्येक चार व्यक्ति पर एक रामचरितमानस है।

बेटियों के साक्षर हुए बिना समाज नहीं सुधर सकता

ढोल, गंवार शूद्र, पशु, नारी यह सब ताडऩ के अधिकारी। महाराज ने इस चौपाई का अर्थ बताते हुए कि यह सब ताडऩा नहीं कि ताडऩ यानी कि शिक्षा लेने के अधिाकरी हैं। शिक्षा का महत्व बताते हुए कहा कि जब तक बेटी नहीं पढ़ेगी, तब तक समाज नहीं सुधर सकता। यदि इस देश को कुछ करना है, तो हमारे देश की नारियों, बेटियों को पढ़ाना चाहिए। आप जितना खर्च बेटों की पढ़ाई पर करते हैं, उससे ज्यादा बेटियों की पढ़ाई पर करना चाहिए। महाराज ने कहा कि वह कभी सुखी नहीं रह सकता, जहां बेटे को बेटी से अधिक मान दिया जाता है। बेटा पत्नी के कहने पर मां को मारता है, घर से निकाल देता हे, छोड़ देता है, पर बेटी माता-पिता को कभी नहीं छोड़ती।

बेटा एक, बेटी दो कुलों का मान बढ़ाती है

महाराज ने कहा कि गोस्वामी जी कहते हैं कि बेटी का सम्मान करना चाहिए। एक बेटी 100 बेटों के बराबर होती है। बेटा एक लायक रहा तो एक कुल का मान बढ़ाता है और बेटी दो कुलों का मान बढ़ाती है। मां शिक्षित होगी तो हमें भी शिक्षित करेगी, संस्कार देगी। इसके लिए गांधारी और कुंती का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधारी अशिक्षित थी और अपने आंखों पर पट्टी बांध कर रखी थी, ताकि अपने बेटों के अवगुणों को देख न सके। जबकि उसे अपने पति की आंखें बनना चाहिए था। उधर कुंती ने वन में रहकर भी अपने बेटों को अच्छी शिक्षा दी, अच्छे संस्कार दिए, जिनको नारायण भी प्रणाम करते थे। महाराज जी ने बताया कि महिला पढ़ी-लिखी संस्कारी हो तो पूरे देश का भाग्य बदल जाता है। महाराज ने बताया कि जब तक बेटी का जन्म नहीं होता, तब तक मां की कोख पवित्र नहीं होती है। श्री रामकथा 31 जनवरी तक नियमित आयोजित की जाएगी।

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