ब्रेकिंग
सीहोर में प्रशासनिक दावों की खुली पोल, उफनते नाले के बीच कमर तक पानी में जान जोखिम में डालकर निकली श... चिटफंड ठगी पर ED की बड़ी स्ट्राइक: विशाखापट्टनम और हैदराबाद में छापेमारी, ₹1.01 करोड़ कैश बरामद व 18... संसद में नीट पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई पर हंगामा: गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग पर अड़ा विपक्... पूर्णिया सांसद पप्पू यादव की बढ़ीं कानूनी मुश्किलें, राम मंदिर चोरी पर नुक्कड़ नाटक करने के मामले मे... दलीप ट्रॉफी 2026: वेस्ट जोन टीम में बड़ा बदलाव, सरफराज खान की जगह 25 साल के जय गोहिल को मिला मौका फरहान अख्तर का रणवीर सिंह पर तीखा तंज: 'डॉन 3' की शूटिंग से 1 महीने पहले एक्टर के पीछे हटने पर बयां ... रूस की सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, यूक्रेन युद्ध का विरोध करने वाली एकमात्र पार्टी 'याब्लोको' चुनाव... प्राइमरी मार्केट में कमाई का महा-कुंभ: 30 सितंबर की SEBI डेडलाइन से पहले ₹45,000 करोड़ के IPO लाने क... होटल का Wi-Fi इस्तेमाल करते हैं तो हो जाएं सावधान! माइक्रोसॉफ्ट ने 'कैप्टिवक्रंच' साइबर अटैक को लेकर... नाग पंचमी 2026: सावन सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग! जानें नाग देवता की पूजा की परंपरा और कथा
देश

अब राख के भी दिन फिरने लगे, बर्तन मांजने के लिए खरीद रहे लोग 

मुंबई। हम सभी ने अपने घरों में अपने बड़े-बूढ़ों को गाय के गोबर और लकड़ी को चूल्हे में जलाने के बाद बनी राख से बर्तन मांजते हुए देखा है। आज भी किसी शुद्ध काम के लिए कई घरों में बर्तनों को सर्फ या बार की बजाय राख से ही धोया जाता है।  हालांकि, समय के साथ-साथ ये बहुत कम हो गया और मॉर्डनाइजेशन के नाम पर इसका इस्तेमाल बंद कर दिया गया है। लेकिन अब फिर से लोग राख को खरीदकर कर उसका इस्तेमाल करने लगे हैं।
अमेजन पर राख 1800 रुपये प्रति किलो मिल रही है। पहले जो राख घरों में आमतौर पर मिल जाती थी अब उसे शहरों में हजारों रुपये में बेचा जा रहा है। जाहिर है कि मांग होने के कारण इन्हें महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। अमेजन पर एक कंपनी द्वारा बेचे जा रही राख के बारे में लिखा है कि यह बर्तन मांजने के लिए एकदम सही प्रोडक्ट है। बता दें कि राख को खुले में नहीं बल्कि एक बेहतरीन पैकेजिंग के साथ बेचा जा रहा है।
ये कोई पहला उत्पाद जो हमारे पूर्वज इस्तेमाल करते और फिर अब उस ऑनलाइन बेचा जाने लगा। इससे पहले दातून, पत्तों से बने बर्तन, पूजा के लिए लकड़ी और यहां तक की गाय के गोबर से बने उपले भी कई सौ रुपये में बिकते हुए दिखे।  जो सामान हमें आमतौर पर घरों में फ्री में मिलता था उसके लिए अब पैसे चुकाने पड़ रहे हैं।
राख घरों में इसलिए खत्म होना शुरू हो गई क्योंकि चूल्हे पर खाना पकाना बंद कर दिया गया। दरअसल, लकड़ी या उपले के जलने से जो धुंआ होता था उसे पर्यावरण के लिए हानिकारक बताया गया।

Related Articles

Back to top button