ब्रेकिंग
गांव की महिला को प्रेग्नेंसी से गंभीर खतरा, प्रोटोकॉल छोड़ हाल जानने पहुंचे सागर कलेक्टर फिल्मी स्टाइल में रुकी वैन, पति ने किया पत्नी और बच्चों को किडनैप, CCTV में कैद वारदात बुरहानपुर में ट्रासंफॉर्मर चोरों से त्रस्त किसान पहुंचे पुलिस के पास तो मिली अजीब सलाह बिना अनुमति हॉस्टल निर्माण पर 2 विभागों में तू-तू मैं-मैं, जीवाजी विश्वविद्यालय को 100 करोड़ का झटका... टायर फटते ही भड़की आग, चिल्लाता रहा ट्रक ड्राइवर, अंत में जलती बस के आगे ट्रक लेकर कूदा सोनचिरैया अभ्यारण्य में लकड़ी माफियाओं की घुसपैठ, तस्करों से वन विभाग की मुठभेड़ मकर संक्रांति पर यहां भगवान खुद उड़ाते हैं पतंग, अद्भुत है बुरहानपुर के इस मंदिर की मान्यता बागेश्वर धाम पहुंचे रशियंस, साधु जी सीता राम के लगाए जयकारे, मकर संक्रांति से पहले लिया बाबा का आशीर... भोपाल में दूषित पानी को लेकर 'जल सुनवाई', बीमारियों के सबूत लेकर पहुंचे लोग वर्दी का अहंकार! गोरखपुर में फॉरेस्ट गार्ड ने किसान को सड़क पर जानवरों की तरह पीटा, वीडियो वायरल होत...
राज्य

सेंट्रल यूनिवर्सिटी आफ झारखंड के डिप्टी रजिस्ट्रार को दो साल की सजा

सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश प्रभात कुमार शर्मा की अदालत ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी आफ झारखंड (सीयूजे) ब्राम्बे में एयर कंडीशनर की खरीदारी में पद का दुरुपयोग करने के मामले में सीयूजे के तत्कालीन डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. कालीपद मोहंता एवं मेसर्स जयंत एजेंसी रांची के संचालक केवल चौहान को दोषी पाया है। कोर्ट ने दोषियों को दो-दो साल की सजा सुनाई है।

इसके साथ ही सीबीआई की विशेष अदालत ने दोनों पर जुर्माना भी लगाया गया है। मामले के आरोपी सीजेयू के पहले रजिस्ट्रार डॉ. श्याम नारायण को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

बता दें कि कालीपद मोहंता पर साल 2010 की अवधि के दौरान धोखाधड़ी और जालसाजी के उद्देश्य से एसी खरीदारी में जयंत एजेंसी से मिलकर आपराधिक कदाचार करने का आरोप है। सीजेयू में 217 एसी की खरीद में उन्होंने पद का दुरुपयोग कर फर्जी कोटेशन के आधार पर खुली निविदा का सहारा लिए बिना जयंत एजेंसी को आपूर्ति काम दे दिया।

इससे सीजेयू को 7.38 लाख रुपये की हानि हुई। भ्रष्टाचार का खुलासा होने के बाद सीबीआइ ने 30 जनवरी 2014 को तीन आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच प्रारंभ की थी। तीनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने 18 दिसंबर 2017 को आरोप तय किया था। सीबीआइ की ओर से 13 अप्रैल 2022 तक साक्ष्य प्रस्तुत किया गया था।

 

Related Articles

Back to top button