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बागेश्वर मंदिर में कैसे लगती है अर्जी, सपने से कैसे पता चलता है आपकी अर्जी स्वीकार हुई या नहीं?

उज्जैन. इस बार हनुमान जयंती (hanuman jayanti 2023) का पर्व 6 अप्रैल, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन देश के सभी हनुमान मंदिरों में विशेष आयोजन किए जाते हैं। वैसे तो हमारे देश में हनुमानजी के अनेक प्राचीन मंदिर हैं।

इन सभी मंदिरों से कोई न कोई मान्यताएं व परंपरा जुड़ी हुई है, जो इसे खास बनाती है। ऐसा ही एक मंदिर बागेश्वर धाम सरकार (Bageshwar Dham Sarkar)। वर्तमान में आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कारण ये मंदिर काफी चर्चाओं में बना हुआ है। हनुमान जयंती के मौके पर जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें.

ये है बागेश्वर धाम मंदिर का इतिहास
बागेश्वर धाम मंदिर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है। यहां स्थित हनुमानजी की प्रतिमा को बालाजी के नाम से जाना जाता है। वैसे तो ये मंदिर काफी प्राचीन है लेकिन इसका वर्तमान स्वरूप 1986 का बताया जाता है। साल 1987 में यहां संत सेतु लालजी आए, इसके बाद यहां की प्रसिद्धि दिनोंदिन बढ़ने लगी। संत सेतुलालजी आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दादाजी थे। साल 2012 में यहां समस्याओं के निराकरण के लिए दरबार लगना शुरू हुआ। धीरे-धीरे इसकी प्रसिद्धि बढ़ती गई।

कपड़े के रंग से होती है समस्या की पहचान
बागेश्वर धाम मंदिर में परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए अर्जी लगाने की परंपरा है। ये प्रक्रिया बहुत ही आसान है। इसके लिए आपको अपनी समस्या पर्ची पर लिखकर नारियल के साथ कपड़े में बांधकर परिसर में रखना होता है। खास बात ये है कि यहां आपको तीन अलग-अलग कपड़ों में बंधे नारियल दिखाई देंगे। अगर आपकी अर्जी सामान्य है तो और लाल कपड़े में नारियल बांधें, अगर विवाह से जुड़ी अर्जी है तो पीले कपड़े में और प्रेत बाधा से जुड़ी है तो काले कपड़े में बांधकर रखा जाता है।

कैसे पता करें अर्जी स्वीकार हुई या नहीं?
बागेश्वर धाम सरकार में आपके द्वारा लगाई गई अर्जी स्वीकार हुई है या नहीं, इसे पता करने की मान्यता भी काफी खास है। आचार्य धीरेंद्र शास्त्री के अनुसार, अगर अर्जी लगाने के बाद घर के किसी सदस्य को सपने में बंदर दिखाई दे तो समझना चाहिए कि आपकी अर्जी स्वीकार हो गई है। ऐसा भी कहा जाता है कि अगर आप बागेश्वर धाम जाने में असमर्थ हैं तो अपने घर के पूजा स्थल पर भी नारियल के साथ अपनी अर्जी लगा सकते हैं। ऐसा करने से भी आपकी परेशानी दूर हो सकती है।

कैसे पहुंचें बागेश्वर धाम?
– छतरपुर मध्य प्रदेश का महत्वपूर्ण शहर है। ये सड़क मार्ग द्वारा पूरे देश से जुड़ा हुआ है। ये भोपाल से लगभग 365 किमी दूर है।
– बागेश्वर धाम जाने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन छतरपुर या खजुराहो है। यहां से आपको टैक्सी या बस भी आसानी से मिल जाएगी।
– छतरपुर से सबसे नजदीक का एयरपोर्ट खजुराहो है, जो यहां से 45 किमी दूर है। यहां से भी सड़क मार्ग द्वारा बागेश्वर धाम सरकार पहुंचा जा सकता है।

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