ब्रेकिंग
Jabalpur-Bhopal NH-45 Toll News: जबलपुर-भोपाल हाईवे पर शाहपुरा टोल टैक्स वसूली पर रोक; नितिन गडकरी न... Nitin Gadkari Bhopal Visit: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का सख्त रुख; RTO में भ्रष्टाचार पर बोले— 'गा... Mandla CMO Bribe Trap: मंडला में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई; 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़... Rajasthan Mayor Election Results: राजस्थान के नगर निगमों में बीजेपी का ऐतिहासिक परचम; जयपुर, जोधपुर ... UP Assembly Election Prep: टिकट के लिए अब दिल्ली-लखनऊ में लॉबिंग नहीं चलेगी, जिलों से तैयार होगी उम्... UP International Trade Show Greater Noida: 85 देशों के खरीदार होंगे शामिल, जानिए यूपी इंटरनेशनल ट्रे... SIR Process Controversy India: चुनाव आयोग पर उठे सवालों के बाद सड़कों पर उतरी कांग्रेस, CEC ज्ञानेश ... Babulal Marandi on SIR Process: एसआईआर देश हित में; नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का विपक्ष पर तंज, ... Pakur Police Action: पाकुड़ के नयाग्राम में 13 साल के दीनानाथ की निर्मम हत्या; एसडीपीओ कुमार गौरव ने... Jharkhand Voter List SIR Dispute: झारखंड में SIR प्रक्रिया को लेकर घमासान; सीजेपी चलाएगी देशव्यापी आ...
मध्यप्रदेश

श्रावण में नंदी महाराज करेंगे आपकी रक्षा मनोकामना पूरी करने के लिए करें ये काम

 श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा करने से बल, बुद्धि, विद्या और धन की प्राप्ति होती है। साथ ही नंदी महाराज की पूजा करने से भी अधूरी इच्छाएं शीघ्र पूरी होती हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार, महादेव से पहले नंदी की पूजा की जाती है। भोलेनाथ नंदी के माध्यम से पूजा स्वीकार करते हैं। भक्तजन नंदी के माध्यम से पशुपतिनाथ तक अपनी मनोकामना पहुंचाते हैं।

मान्यता है कि स्वयं त्रयम्बक ने नंदी को वरदान दिया था। अगर कोई जातक अपनी इच्छा तुम्हारे कान में कहेगा तो उसकी इच्छा मुझ तक पहुंचेगी और शीघ्र पूरी होगी। इसलिए नंदी महाराज के कान में कामना कहने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

नंदी के कान में कहें अपनी इच्छा

श्रावण मास में भगवान शंकर के अभिषेक का महत्व है। आप मंदिर जाएं और शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। अब बचा हुआ जल नंदी महाराज के पैरों पर डालें। अब अपनी इच्छा नंदी के कान में कहें।

सावन शिवरात्रि पर इन राशियों बरसेगी भगवान शिव की कृपा, खुल जाएगा बंद किस्मत का ताला

नंदी महाराज की पूजा करते करते समय पहले ऊँ का उच्चारण करना चाहिए। ऊँ ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिमूर्ति का प्रतीक है। इसलिए वैदिक मंत्रों के आरंभ में ऊँ का उच्चारण किया जाता है।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Related Articles

Back to top button