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मध्यप्रदेश

विपक्षी दल के नेता भी नजर लगाए बैठे, आखिर भाजपा किसे उतार रही है

पंकज तिवारी, जबलपुर। लोकसभा में जीत का परचम फहरा चुके सांसद के इस विधानसभा चुनाव में उतरने के संकेत मिल रहे है। उनके मैदान में उतरने की हवा से ही दूसरे दावेदारों को सदमा लग गया है क्योंकि उनकी पसंद पर टिकट तय होनी है। कहा जा रहा है कि कुछ उन्हें पश्चिम के रण में कुदवाने का प्रयास कर रहे हैं हालांकि सांसद के करीब कहते हैं उनकी पसंद उत्तर मध्य बनी हुई है जहां भाजपा के लिए जीतने की संभावना अधिक मानी जा रही है। इस विधानसभा से पहले ही पूर्व मंत्री, घर वापसी करने वाले युवा नेता समेत दर्जनभर दावेदार कतार में लगे हुए हैं। ऐसे में सांसद के मैदान में कूदने की हवा चलने से टिकट का मुकाबला और रोचक होने की उम्मीद लगाई जा रही है। इधर विपक्षी दल के नेता भी नजर लगाए बैठे हैं कि आखिर भाजपा किसे इस बार प्रत्याशी बनाकर चुनाव में उतार रही है।

विधानसभा चुनाव के बीच टिकट के दावेदार केंद्रीय नेताओं के करीबी बनने की होड़ में लगे हैं। इस विधानसभा चुनाव में पार्टी ने प्रदेश संगठन से ज्यादा केंद्रीय नेतृत्व को अधिक तवज्जों दी हुई है। गृहमंत्री अमित शाह खुद पूरे चुनाव पर अपनी विशेष रूचि ले रहे है। दावेदारों को यह बात महिनों पहले से समझ आ गई थी, कि इस बार चुनाव की कमान केंद्रीय स्तर पर होगी। लिहाजा दूरदर्शी सोच रखने वाले दावेदारों ने पहले ही ऐसे केंद्रीय नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर लिया था। कई नेताओं अपनी पकड़ को जाहिर करने के लिए केंद्रीय नेताओं के साथ आए दिन इंटरनेट मीडिया में फोटो वायरल करते नजर आते हैं। अब पार्टी जिस तरह से टिकट तय कर रही है उससे दावेदार केंद्रीय स्तर के संपर्क करने में जुट गए हैं,ताकि उनकी उम्मीदवारी पर मुहर लग सके। हालांकि पार्टी जीताओं उम्मीदवार को ही मौका देने के मूड में है।

नेता करते रहे इंतजार नहीं मिल पाए

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का दौरा शनिवार की रात हुआ। प्रदेश के विधानसभा चुनाव के प्रभारी होने के लिहाज से उनकी पूछपरख अधिक थे। खासतौर पर टिकट चाहने वालों के लिए तो और भी ज्यादा। देर रात तक उनके आगमन का इंतजार नेता गेस्ट हाउस, होटल में करते रहे। इधर सांसद राकेश सिंह भाेपाल से केंद्रीय मंत्री को साथ लेकर जबलपुर आए। वो सीधे मंत्री को अपने आवास में भोजन के लिए ले गए। जहां से मंत्री होटल में पहुंचे। दावेदारों ने भी बिना देरी किए ही मंदी से मुलाकात की और कम वक्त में अपनी दावेदारी को पेश किया। बता दे कई ने दूसरे दिन सुबह का समय मिलने का मांगा था। दावेदार अपनी तैयारी और जातिगत समीकरण का लेखाजोखा लेकर पहुंचे थे,लेकिन मुलाकात से पहले ही मंत्री का काफिला चित्रकूट के लिए रवाना हो गया। बहरहाल कई दावेदारों को मंत्री से नहीं मिल पाने का मलाल रह गया।

स्मार्ट मीटर लगने से पहले विरोध तेज

हर नई व्यवस्था को लागू होने से पहले उसकी खूबियों से ज्यादा खामियों पर हल्ला होता है। ऐसा ही कुछ इन दिनों स्मार्ट मीटर पर हो रहा है। जिसे लगाने का सिलसिला शुरू हुआ और विपक्ष में बैठी कांग्रेस के एक नेता इस मामले में मुखर हो गए है। कांग्रेस के सौरभ नाटी शर्मा ने बिजली से जुड़े मसलों पर हल्ला बोला। कंपनी से तेज चलते हुए नेताजी ने स्मार्ट मीटर में तकनीकी खामियां निकाल डाली। जहां मीटर लगना शुरू हुए वहां खूब हंगामा भी किया, हालांकि बाद में समझाइश का दौर चला और नेताओं को बिजली अफसरों ने संतुष्ट कर लौटा दिया। इधर नेताजी ने मीटर में खामी दिखाकर नया हल्ला बोल दिया, जबकि बिजली अफसर मीटर के फायदे के बारे में ही उपभोक्ताओं को बताने में नाकाम दिखे। अब जबकि नेता ने इसे तकनीकी पहलुओं की लिस्ट बनाकर उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के नुकसान गिनाना शुरू कर दिया है।

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