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मध्यप्रदेश

परीक्षा दिलाने में नाकाम प्रबंधन ने खाते में डाले पैसे

जबलपुर। नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कालेजों में परीक्षाएं नहीं लिए जाने की समस्या तीन वर्ष से देखने में आ रही है। छात्र परेशान हो रहे हैं, उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। अहिंसा चौक के पास स्थित प्रेमवती कालेज की मान्यता समाप्त कर दी गई थी, इसके बावजूद कालेज में स्टूडेंट्स को न केवल एडमीशन दिलाया गया बल्कि उनसे मोटी रकम ऐंठ कर उनको दो साल से अधिक की पढ़ाई भी करवा डाली। उनको भरोसा दिलाया जाता रहा कि जल्द परीक्षा करा ली जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया तो स्टूडेंट्स ने विरोध करना शुरू कर दिया। नतीजतन कालेज प्रबंधन छात्र-छात्राओं के खाते में आधा-अधूरी रकम लौटा कर उनसे पीछा छुड़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रेमवती कालेज आफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंस में मान्यता रद

विजयनगर अहिंसा चौक के पास स्थित प्रेमवती कालेज आफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंस में मान्यता रद होने के बावजूद पहले तो नर्सिंग के छात्र-छात्राओें को प्रवेश दिया गया। इसके बाद उनसे मोटी रकम भी उगाह ली गई। इसके बाद करीब तीन साल बीत गए, लेकिन उनकी परीक्षा नहीं हो पाई। लाखों रुपये फूंकने के बावजूद जब वर्षों की मेहनत जाया होती दिखी तो छात्र-छात्राओं ने कालेज प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठाना भी शुरू कर दिया।

इनके खातों में डाली राशि

छात्र-छात्राओं का कहना है कि वो अपना दो से तीन साल का वक्त बर्बाद करके दो-दो लाख रुपये से अधिक खर्च कर चुके हैं। इसबी एवज में कालेज प्रबंधन की ओर से आधे से भी कम रकम लौटाई जा रही है। दीनदयाल दीवान के खाते में 86 हजार 500, दीपिका ठाकुर के खाते में 77 हजार 500, अजय दोना के खाते में 79 हजार, रोशनी पटैल को 87 हजार, अनुज चौबे को 91 हजार, रश्मि पटैल को 86 हजार 500, साहिल पटैल को 73 हजार, तिलक राज को 50 हजार और राकेश लोधी को 89 हजार रुपये लौटाए गए हैं। जब इन छात्र-छात्राओं ने और पैसों की मांग की तो उनसे कह दिया गया कि आप लोगाें का हिसाब-पूरा हो गया है।

विजयनगर थाने पहुंचे स्टूडेंट

कालेज की मनमानी से परेशान स्टूडेंट्स विजय नगर थाने भी पहुंचे। यहां उन्होंने कालेज प्रबंधन के विरुद्ध एफआइआर कराने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उनको बैरंग लौटा दिया। पुलिस ने उनको यह सलाह जरूर दे दी कि वो उपभोक्ता फाेरम में जाकर केस लगा दें। इस मामले में कालेज प्रबंधन से भी बात करने का प्रयास किया गया। वहां के डायरेक्टर अजय तिवारी के मोबाइल पर अनेक मर्तबा काल लगाई गई। मैसेज भी किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।

कालेज की मान्यता तीन से रद है, फिर भी हम लोगों को एडमिशन दे दिया गया। इस बात की जानकारी हम लाेगाें को काफी बाद में प्राप्त हुई।

रोशनी पटेल, जीएनएम

स्टूडेंट्स को लगातार गुमराह किया जाता रहा कि जल्द परीक्षा ले ली जाएगी। किसी का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा, परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ।

दीनदयाल दीवान, जीएनएम

हम लोगों से दो-दो लाख रुपये से अधिक खर्च कराए जा चुके हैं, जबकि लौटाने के नाम पर आधी-अधूरी राशि खातों में डाली जा रही है।

अनुज चौबे, जीएनएम

हम लोगों का तीन साल बर्बाद हो गया, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। जब हम पुलिस में एफआइआर कराने पहुंचे तो वहां से भी हमें लौटा दिया गया।

अजय दोना, जीएनएम

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