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धार्मिक

विकट संकष्टी चतुर्थी पर इस मुहूर्त में चंद्रमा को दें अर्घ्य, बरसेगी बप्पा की कृपा!

हिन्दू धर्म हर साल वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. इस साल विकट संकष्टी चतुर्थी पर खास संयोग बन रहा है. इस संयोग में पूजा करने से भगवान गणेश की विशेष कृपा बरसती है और लोगों को जीवन में आने वाले कष्टों से छुटकारा मिलता है. इसके साथ ही घर परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं.

वैशाख माह की पहली चतुर्थी के दिन पूरे विधि-विधान से गणेश जी की पूजा की जाती है और रात के समय चंद्रमा की पूजा करने के साथ अर्घ्य दिया जाता हैं. जो लोग विधि विधान से विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखते हैं, उनके जीवन में आने वाली विघ्न और बाधाएं दूर हो जाती हैं. गणपति बप्पा के आशीर्वाद से लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

पंचांग के मुताबिक, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 27 अप्रैल को सुबह 08 बजकर 17 मिनट पर शुरू होगी और यह ति​​थि 28 अप्रैल को सुबह 08 बजकर 21 मिनट तक मान्य रहेगी. इस व्रत में चतुर्थी तिथि में चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य समय का महत्व होता है. चतुर्थी तिथि 27 अप्रैल को सूर्योदय के बाद शुरू हो रही है, लेकिन चतुर्थी​ तिथि में चंद्रोदय 27 अप्रैल को ही होगा. क्योंकि अगले दिन चतुर्थी 28 अप्रैल को सुबह में ही खत्म हो जाएगी.

इस योग में करें पूजा-अर्चना

इस बार साल 2024 में विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत परिघ योग और ज्येष्ठा नक्षत्र में पड़ रहा है जिससे इस व्रत का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है. 27 अप्रैल को परिघ योग प्रात:काल से लेकर 28 अप्रैल को तड़के 03 बजकर 24 मिनट तक रहेगा. वहीं ज्येष्ठा नक्षत्र भी प्रात:काल से शुरु होकर 28 अप्रैल को प्रात: 04 बजकर 28 मिनट तक रहेगा.

विकट संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय

विकट संकष्टी चतुर्थी वाले दिन चंद्रोदय रात में 10 बजकर 23 मिनट पर होगा. इस वजह से उस समय ही चंद्रमा का पूजन होगा और अर्घ्य दिया जाएगा. विकट संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा की पूजा का समय रात 10:23 पीएम से है.

विकट संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

  • भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और निवृत्त होकर स्नान करके व्रत का संकल्प लें.
  • सूर्योदय के समय भगवान सूर्य देव को जल से अर्घ्य दें और इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें.
  • मंदिर में एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति विराजमान करें.
  • अब गणपति बप्पा को दूर्वा और मोदक अर्पित करें. देशी घी का दीपक जलाकर आरती करें और गणेश चालीसा का पाठ करें.
  • पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करना बहुत ही फलदायी होता है. इसके पश्चात गणेश जी मोदक, फल और मिठाई का भोग लगाएं.
  • अंत में भगवान गणपति का प्रसाद लोगों में वितरण करें और खुद भी ग्रहण करें.
  • विकट संकष्टी चतुर्थी पर अगर हो सके तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान भी कर सकते हैं.

गणेश गायत्री मंत्र

ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

शुभ लाभ गणेश मंत्र

ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।।

सिद्धि प्राप्ति हेतु मंत्र

श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा ॥

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