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मध्यप्रदेश

उज्जैन के उस चर्च की कहानी, जिसपर 78 साल से लिखा था मंदिर, अब इस शब्द को हटाया गया

मंदिर शब्द सनातन का प्रतीक है, लेकिन उज्जैन के एक चर्च पर इस शब्द का उपयोग लगभग 78 सालों से किया जा रहा था. जिसको लेकर दो दिनों पहले विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने अनुविभागीय अधिकारी को एक ज्ञापन दिया था और मंदिर शब्द को हटाने की मांग की थी. प्रशासन को ज्ञापन देने के बाद बजरंग दल के नेता ट्रस्ट के जिम्मेदारों लोगों से भी मिले थे. जिन्हें उन्होंने सख्त लहजे में यह चेतावनी दी थी कि अगर दो दिनों में मंदिर शब्द नहीं हटाया जाता तो फिर हम उग्र आंदोलन करेंगे.

विहिप और बजरंग दल की इस चेतावनी की समय सीमा पूरी होने से पहले से ही चर्च से मंदिर शब्द हटा लिया गया है.पूरे मामले की जानकारी देते हुए विहिप के जिलाध्यक्ष महेश तिवारी ऋषभ कुशवाहा ने बताया कि देवास रोड पर पिछले कई सालों से मसीही मंदिर चर्च देवास रोड नाम की संस्था मसीही चर्च के नाम के साथ मंदिर शब्द का उपयोग कर रही थी. चर्च के साथ मंदिर शब्द का उपयोग किए जाने से कई प्रकार की भ्रांतियां फैल रही थी.

चर्च बोर्ड से हटाया गया मंदिर शब्द

जिसको लेकर हमने अनुविभागीय अधिकारी लक्ष्मीनारायण गर्ग को एक आवेदन दिया था और मांग की थी कि जल्द से जल्द मंदिर शब्द को चर्च के बोर्ड से हटाया जाए. क्रिसमस पर्व के पहले इस मुद्दे को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल कोई हंगामा न मचाए इसे देखते हुए. संस्था ने अपने बोर्ड से मंदिर शब्द हटा लिया है. विहिप नेता ऋषभ कुशवाहा ने बताया कि चर्च के नाम के साथ मंदिर शब्द का उपयोग होने से हमारी धार्मिक आस्था आहत हो रही थी.

‘भ्रमित हो रहे थे लोग’

साथ ही सनातनी लोग भी इस प्रकार का नाम लिखे जाने से भ्रमित हो रहे थे. अक्सर देखा जाता है कि मंदिर शब्द का उपयोग सनातनी देवालयों के लिए ही होता रहा हैं, अन्य कहीं भी नही होता है. इसलिए पहले अनुविभागीय अधिकारी को इस मामले में ज्ञापन दिया गया था. उसके बाद मसीही मंदिर चर्च देवास रोड उज्जैन के जिम्मेदार लोगों से मिलकर उन्हें मंदिर शब्द हटाने का निवेदन किया था जिस पर उन्होंने तुरंत इस शब्द को हटा लिया है.

1946 में हुई थी स्थापना

बताया जाता है कि देवास रोड स्थित मसीही मंदिर ट्रस्ट की स्थापना 15 अक्टूबर 1946 को हुई थी. इसके बाद से लगातार सभी स्थानों पर मसीही मंदिर ट्रस्ट के नाम का ही उपयोग किया जा रहा था.

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