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विदेश

LNG, QIA और रक्षा सहयोग… जानें कतर के अमीर का भारत दौरा क्यों है खास

कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के दो दिवसीय भारत दौरे ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कतर के अमीर के बीच हैदराबाद हाउस में हुई उच्च स्तरीय बातचीत में निवेश, व्यापार, ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई.

इस दौरे की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर खुद एयरपोर्ट पर जाकर कतर के अमीर का स्वागत किया. इससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत इस संबंध को कितनी प्राथमिकता दे रहा है. इस मुलाकात के दौरान दो प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए.

  • रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का समझौता
  • दोहरा कराधान बचाव समझौता (Double Taxation Avoidance Agreement). ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को और सुगम बनाया जा सके.

भारत और कतर को इस दौरे से क्या मिलेगा?

भारत को क्या मिलेगा?

  1. ऊर्जा सुरक्षा: कतर भारत का सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता है, जो भारत की कुल जरूरत का 40% लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) प्रदान करता है. इस दौरे में ऊर्जा आपूर्ति को दीर्घकालिक और अधिक स्थिर बनाने पर सहमति बनी. भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए कतर की गैस आपूर्ति औद्योगिक विकास, बिजली उत्पादन और परिवहन क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी है.
  2. निवेश और व्यापार: क्यूआईए (Qatar Investment Authority) भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप सेक्टर में अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है. कतर ने भारत में निवेश बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा. आपसी समझौतों में व्यापार नीति को सुगम बनाने के लिए बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया गया. 2018-19 में भारत-कतर का कुल व्यापार 10.95 बिलियन डॉलर था, जो अब बढ़ कर 14 बिलियन डॉलर हो गया है और इस दौरे के बाद इसमें और वृद्धि की उम्मीद है.
  3. प्रवासी भारतीयों का कल्याण: कतर में लगभग 8 लाख भारतीय प्रवासी काम कर रहे हैं, जो कतर की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. साथ ही ये प्रवासी चार बिलियन डॉलर से अधिक की कमाई कर भारत भेजते है. भारतीय श्रमिकों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर भारत सरकार और कतर सरकार के बीच बेहतर सहयोग पर सहमति बनी. कतर में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों और श्रमिकों की भलाई के लिए श्रम सुधारों पर चर्चा हुई.
  4. रणनीतिक और रक्षा सहयोग: भारत और कतर के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी. समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद निरोधी अभियानों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई. हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और नौवहन सहयोग को और मजबूत करने के लिए बातचीत हुई.

कतर को क्या मिलेगा?

  1. बड़ा और तेजी से बढ़ता भारतीय बाजार: भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और कतर के लिए एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है. कतर भारत को पेट्रोकेमिकल्स, उर्वरक और एल्यूमिनियम जैसे उत्पाद निर्यात करता है. कतर को भारत में नए निवेश अवसर मिलेंगे, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे. वर्तमान में कतर ने भारत में 1.8 बिलियन डॉलर का निवेश कर रखा है.
  2. खाद्य सुरक्षा: कतर अपनी खाद्य आवश्यकताओं का 90% आयात करता है और भारत इसमें एक प्रमुख भागीदार है. भारत से कतर को चावल, गेहूं, फल और डेयरी उत्पादों का निर्यात होता है. इस दौरे में दोनों देशों ने खाद्य सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया.
  3. भारतीय प्रतिभा और श्रम शक्ति: कतर के निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा और IT सेक्टर में भारतीयों की बड़ी भूमिका है. कतर को अधिक भारतीय पेशेवरों और कुशल श्रमिकों की जरूरत है, जिससे दोनों देशों के बीच मानव संसाधन सहयोग बढ़ेगा.
  4. रणनीतिक और रक्षा सहयोग: भारत और कतर के बीच रक्षा संबंधों को गहरा करने के लिए विभिन्न स्तरों पर सहयोग को मजबूत किया जाएगा. साइबर सुरक्षा और खुफिया साझेदारी पर भी चर्चा हुई.

भारत-कतर संबंध क्यों हैं अहम?

भारत और कतर के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह ऊर्जा, सुरक्षा, निवेश और प्रवासी कल्याण के महत्वपूर्ण स्तंभों पर आधारित हैं. कतर पश्चिम एशिया में भारत का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार है. भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने में कतर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. कतर में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी कार्यरत हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और भी मजबूत हैं. व्यापार और निवेश के बढ़ते अवसरों से दोनों देशों को लाभ होगा.

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