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दिलचस्‍प हुआ राज्‍यसभा चुनाव, आजसू ने कटवाया रघुवर का टिकट; कांग्रेस में सिर फुटौव्‍वल

रांची। राज्यसभा चुनाव में भाजपा को आजसू का समर्थन मिल सकता है। आजसू के विधायक भाजपा के प्रत्याशी को अपना वोट दे सकते हैं। हालांकि आजसू ने अभी अपना स्टैंड क्लीयर नहीं किया है, लेकिन भाजपा द्वारा दीपक प्रकाश को उम्मीदवार घोषित किए जाने से इसकी संभावना बढ़ गई है। पूर्व में आजसू ने कहा था कि वह पार्टियों द्वारा प्रत्याशी की घोषणा किए जाने के बाद ही अपना पत्ता खोलेगी। इधर, चर्चा यह है कि आजसू के रुख के कारण ही भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार नहीं बनाया। रघुवर दास का आजसू प्रमुख सुदेश महतो के साथ संबंध अच्छा नहीं रहा है। विधानसभा चुनाव में गठबंधन टूटने में भी एक बड़ा कारण इन दोनों नेताओं के बीच कटुता रही थी। हालांकि विधानसभा चुनाव के बाद आजसू के वरिष्ठ नेता चंद्रप्रकाश चौधरी सांसद के रूप में एनडीए की बैठक में शामिल होते रहे हैं। बरकट्ठा के निर्दलीय विधायक अमित यादव भी रघुवर दास के नाम पर राजी नहीं थे।

राज्यसभा चुनाव में समर्थन का निर्णय पार्टी की बैठक में लिया जाएगा। एक-दो दिनों में इसपर निर्णय ले लिया जाएगा। डा. देवशरण भगत, केंद्रीय प्रवक्ता, आजसू। 

सरयू बोले, गुण-दोष पर करेंगे निर्णय

निर्दलीय विधायक सरयू राय अपने पुराने स्टैैंड पर अडिग हैैं। उनका कहना है कि प्रत्याशी के गुण-दोष के आधार पर वे फैसला लेंगे।

राज्यसभा के लिए कांग्रेस आज घोषित कर सकती है उम्मीदवार का नाम

झारखंड में राज्यसभा की एक सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार का नाम गुरुवार को जारी हो सकता है। सत्ताधारी गठबंधन की ओर से पहली सीट झामुमो के पाले में गई है, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस को उम्मीदवार देना है। इसी सीट के लिए भाजपा की उम्मीदवारी भी है और इस कारण कड़े मुकाबले के आसार हैं। अब कांग्रेस उम्मीदवार का नाम सामने आने के बाद ही विधायकों का रुख सामने आ सकता है। कांग्रेस विधायक दल के नेता सह मंत्री आलमगीर आलम ने बताया कि गुरुवार शाम तक उम्मीदवार का नाम फाइनल हो जाएगा। इसे लेकर नई दिल्ली में चुनाव समिति की बैठक बुलाई गई है।

सत्ता में शामिल कांग्रेस के लिए अपने विधायकों के अलावा झामुमो के कुछ एमएलए और कुछ निर्दलीय विधायकों का साथ आवश्यक है। कांग्रेस के 16 विधायकों के साथ-साथ झाविमो से कांग्रेस में आए दो विधायकों को जोड़ दें तो संख्या 18 हो रही है। दूसरी ओर, माना जा रहा है कि झामुमो के 29 विधायकों में से शिबू सोरेन के वोट देने के बाद शेष विधायक कांग्रेस को वोट करेंगे वहीं राजद के एकमात्र विधायक सह मंत्री भी कांग्रेस के पक्ष में होंगे। अब देखना है कि कांग्रेस किसी स्थानीय नेता को मैदान में उतारती है या केंद्र से किसी उम्मीदवार को जिम्मेदारी दी जाती है।

उम्मीदवार थोपा गया तो कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ेंगी

राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस उम्मीदवार का चयन पार्टी के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है। तत्काल नहीं तो लंबे समय में यह देखने को मिल ही जाएगा। इसका बड़ा कारण यह है कि प्रदेश के सीनियर कांग्रेस नेता ऊपर से उम्मीदवार थोपे जाने का विरोध कर रहे हैं। संगठन में विभिन्न स्तरों पर इसकी जानकारी दे भी दी गई है। झारखंड से किसी उम्मीदवार को राज्यसभा के लिए टिकट देने की मांग करते हुए पहले भी प्रदेश स्तर के नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह को अपने विचारों से अवगत करा दिया था। इधर, मध्यप्रदेश में कांग्रेस विधायकों के संभावित विरोध को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व फूंक-फूंक कर निर्णय ले रहा है। माना जा रहा है कि अब कोई भी निर्णय लेने के पूर्व केंद्रीय नेतृत्व हेमंत सोरेन को भी विश्वास में लेगी।

कांग्रेस के सीनियर नेता केंद्रीय हस्तक्षेप से नाराज

कांग्रेस के कुछ सीनियर नेता पुराने दिनों की बातों को लेकर पार्टी पर दबाव बनाने में लगे हैं। पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान गोड्डा सीट से कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं देने का निर्णय लेकर झाविमो के प्रदीप यादव का समर्थन किया था। इसी दौरान झामुमो और कांग्रेस के नेतृत्व ने पूर्व सांसद फुरकान अंसारी को शांत करते हुए राज्यसभा चुनाव में सकारात्मक तरीके से सोचने की बात कही थी। बाद में उन्हें विधायक का टिकट भी नहीं दिया गया और अब उनकी दावेदारी संकट में है। फुरकान के पुत्र इरफान अंसारी कांग्रेस के विधायक हैं और बार-बार अपने पिता के लिए आवाज उठाते रहते हैं। इस तरह के कई मामले हैं जिसपर कई कांग्रेसी नेता केंद्रीय नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं।

किसी को नाराज करने की स्थिति में नहीं है कांग्रेस

झारखंड में झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के साथ सत्ता पर काबिज कांग्रेस किसी को भी नाराज करने की स्थिति में नहीं है। खासकर भाजपा में बाबूलाल मरांडी के विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद कांग्रेसी सकते में हैं। कांग्रेस को यह विश्वास हो चुका है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व झामुमो को समर्थन देकर सत्ता में शामिल होने की जुगत में है। बाबूलाल मरांडी की ताजपोशी इसी के तहत उठाया गया कदम है। रघुवर दास को राज्यसभा नहीं भेजकर भाजपा ने कहीं न कहीं हेमंत की नाराजगी को भी कम करने का काम किया है।

माना जा रहा है कि आदिवासी चेहरा सामने होने के साथ ही झामुमो के लिए भाजपा भी अछूत नहीं रह गई है। कांग्रेस से किसी प्रकार की खटपट की स्थिति में झामुमो भाजपा की बदौलत सरकार में बनी रहेगी। सूत्रों के अनुसार भाजपा भी ऐसे ही मौके की तलाश में है। इधर, काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन, मंत्रिमंडल से ईसाई सदस्यों को दूर रख झामुमो ने भाजपा के लिए एक बेहतर वातावरण का संकेत तो दिया ही है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस उम्मीदवार को झामुमो कितना पसंद करता है। झामुमो की चुप्पी कांग्रेसी उम्मीदवार की हार की गारंटी होगी। ऐसे भी अभी तक के हालात में भाजपा की उम्मीदवारी मजबूत दिख रही है।

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