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बिहार

क्या लालू से दूर रहकर सियासी करियर सेट कर पाएंगे तेज प्रताप, जानें अब क्या है उनके पास विकल्प?

बिहार की सियासत के बेताज बादशाह कहे जाने वाले लालू प्रसाद यादव का परिवार इन दिनों चर्चा के केंद्र में है. आरजेडी सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और अनुष्का यादव की तस्वीर वायरल होने के बाद बिहार की राजनीति से लालू परिवार तक में कोहराम मचा है. लालू यादव ने बेटे तेज प्रताप से सारा नाता तोड़ लिया है और छह साल के लिए आरजेडी से निष्कासित भी कर दिया है. ऐसे में सभी का निगाहें इस बात पर लगी हैं कि तेज प्रताप यादव का अगला कदम क्या होगा, क्या पार्टी में बनेंगे रहेंगे या फिर कोई दूसरा विकल्प तलाशेंगे?

बिहार की सियासत के बेताज बादशाह कहे जाने वाले लालू प्रसाद यादव का परिवार इन दिनों चर्चा के केंद्र में है. आरजेडी सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और अनुष्का यादव की तस्वीर वायरल होने के बाद बिहार की राजनीति से लालू परिवार तक में कोहराम मचा है. लालू यादव ने बेटे तेज प्रताप से सारा नाता तोड़ लिया है और छह साल के लिए आरजेडी से निष्कासित भी कर दिया है. ऐसे में सभी का निगाहें इस बात पर लगी हैं कि तेज प्रताप यादव का अगला कदम क्या होगा, क्या पार्टी में बनेंगे रहेंगे या फिर कोई दूसरा विकल्प तलाशेंगे?

परिवार से ही मिली पहचान

बिहार की राजनीति में लालू यादव की तूती बोलती रही है. लालू यादव दो बार बिहार के सीएम रहे हैं और चारा घोटाला में नाम आने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सीएम नाम दिया था, जो तीन बार सीएम रहीं. लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और छोटे बेटे तेजस्वी यादव हैं. लालू परिवार के नाम पर दोनों ने अपनी राजनीति शुरू की. तेज प्रताप दूसरी बार विधायक हैं और दो बार मंत्री रह चुके हैं, लेकिन वो अपनी खुद की सियासी पहचान स्थापित नहीं कर पाए.

बिहार की सियासत में तेज प्रताप यादव की पहचान लालू यादव के बेटे के तौर पर ही है. आरजेडी की सेफ सीट से ही चुनाव लड़ते रहे और लालू के नाम पर ही दोनों ही बार विधायक बनने में सफल रहे हैं. ऐसे में आरजेडी बाहर होने के बाद तेज प्रताप के लिए अपने सियासी करियर को बुलंदी पर ले जाना आसान नहीं है, क्योंकि अपने राजनीतिक सफर में अपनी पहचान गंभीर नेता और जनाधार वाले नेता के तौर पर स्थापित नहीं कर सके. ऐसे में परिवार से बाहर रहकर खुद की पहचान बनाने के लिए संघर्ष करते रहना होगा.

विरासत में मिली सियासत

तेज प्रताप यादव को सियासत अपने पिता लालू यादव और मां राबड़ी देवी से विरासत में मिली है. लालू यादव की उंगली पकड़कर ही सियासत में आए हैं और उनकी छाया में ही आगे बढ़े हैं. तेज प्रताप दोनों ही बार अपने परिवार और पार्टी के नाम पर जीत सके हैं. तेज प्रताप यादव किसी आंदोलन या संघर्ष से निकलकर राजनीति में नहीं आए हुए हैं. इसके अलावा न ही किसी राजनीतिक विचारधारा से निकले हैं. इस तरह तेज प्रताप अपने पिता और मां के नाम पर ही सियासत करते रह हैं. ऐसे में पार्टी और परिवार के द्वारा दूरी बनाए जाने के बाद तेज प्रताप के लिए अपनी राजनीतिक पारी को आगे बढ़ाना आसान नहीं है.

लालू का सियासी वारिस कौन?

आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटे-तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव सियासत में है. लालू प्रसाद यादव की राजनीति का वारिस बनने के लिए तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव के बीच सियासी जंग चलती रही है. बिहार विधानसभा चुनाव के बाद से ही तेजस्वी यादव ने खुद को लालू यादव के वारिस के तौर पर स्थापित करने में सफल रहे जबकि तेज प्रताप अपनी छाप नहीं छोड़ पाए हैं.

हालांकि, लालू यादव ने आरजेडी और जेडीयू के बीच गठबंधन टूटने के बाद लालू यादव ने तेजस्वी यादव को पार्टी की विरासत सौंपने का ऐलान किया था. ऐसे में साफ कर दिया था कि भविष्य में उनका सियासी उत्तराधिकारी कौन होगा और आरजेडी की कमान भी किसके हाथ में होगी. 2020 के बिहार चुनाव में आरजेडी के बेहतर प्रदर्शन के लिए तेजस्वी से लालू यादव गदगद थे. आरजेडी में सियासी विरासत के हस्तांतरण को तेजस्वी ने अपने हाथ में लिया और आरजेडी पर अपनी पकड़ मजबूत किया. तेज प्रताप खुद को लालू के सियासी वारिस के तौर पर स्थापित नहीं हो सके.

तेज प्रताप के पास क्या विकल्प हैं?

बिहार की सियासी तपिश के बीच लालू यादव ने तेज प्रताप यादव को छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया है और परिवार से भी निष्कासित कर दिया है. ऐसे में उनके पास सियासी विकल्प के तौर पर क्या है, जिससे अपनी राजनीतिक पारी को आगे बढ़ाएंगे. आरजेडी से बाहर होने के बाद पहला सियासी विकल्प है कि विधानसभा चुनाव तक खामोशी अख्तियार किए रहे हैं. आरजेडी अगर सत्ता में आती है तो बैकडोर से उनकी एंट्री का रास्ता खुल सकता है, लेकिन उसके लिए फिलहाल चुप रहना है.

तेज प्रताप यादव जिस तरह से सियासी तेवर वाले नेता रहे हैं, उसके चलते साफ है कि वो खामोश नहीं बैठने वाले हैं. 2021 में पार्टी से बागी रुख अपनाया तो लालू-राबड़ी के नाम पर एक संगठन बनाया था, जिसका लालू-राबड़ी मोर्चा रखा था. इसके अलावा धर्म समर्थक सेवा संघ, यदुवंशी सेना,तेज सेना, छात्र जनशक्ति परिषद रखा था. ऐसे में फिर से वो किसी संगठन को बनाकर सक्रिय हो सकते हैं.

किसी दूसरी पार्टी में जाने का विकल्प

आरजेडी से बाहर होने के बाद तेज प्रताप यादव के पास किसी दूसरी पार्टी में जाने का विकल्प है. बीजेपी से लेकर एलजेपी, जेडीयू और दूसरी किसी पार्टी का दामन थामकर अपनी राजनीतिक पारी को आगे बढ़ा सकते हैं, लेकिन जिस तरह से आरजेडी में रहे हैं, उस तरह की आजादी उन्हें दूसरी पार्टी में नहीं मिलेगी. इसके अलावा दूसरी पार्टियां क्या उन्हें इतने बड़े विवाद के बाद पार्टी में लेने का जोखिम भरा कदम उठाएंगी. इसके अलावा तेज प्रताप खुद कृष्ण और तेजस्वी यादव को अर्जुन बताते रहे हैं. ऐसे में अपने ही भाई के खिलाफ क्या दूसरी पार्टी में जाकर ताल ठोंके ये मुश्किल ही है.

बिहार विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. ऐसे में तेज प्रताप यादव पार्टी से निष्कासित हैं तो उनके सामने निर्दलीय चुनाव लड़ने का विकल्प है. तेज प्रताप ने अपनी सियासी पारी का आगाज महुआ विधानसभा सीट से किया था, 2015 में इसी सीट से विधायक चुने गए थे. इसके बाद 2020 में हसनपुर सीट से विधायक बने. ऐसे में अगर 2025 में निर्दलीय चुनाव लड़न का विकल्प चुन सकते हैं.

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