Katihar Flood News: कटिहार में राहत सामग्री बांटने पहुंचीं JDU नेत्री की गाड़ी पर टूट पड़े बाढ़ पीड़ित, मिनटों में खाली की गाड़ी

कटिहार (बिहार): बिहार के कटिहार जिले में बाढ़ के प्रकोप के बीच एक अत्यंत मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जिसने राहत और बचाव से जुड़े तमाम प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।
कुर्सेला प्रखंड के रेलवे ढाला के समीप बाढ़ पीड़ितों के लिए सूखा राशन लेकर पहुंचीं जनता दल यूनाइटेड (JDU) की स्थानीय महिला नेत्री को विधिवत पैकेट वितरित करने का अवसर भी नहीं मिल सका। भूखे-प्यासे और बेबस लोगों ने वाहन रुकते ही गाड़ी से पैकेट निकालने शुरू कर दिए। यह घटना कुर्सेला रेलवे ढाला के पास घटी, जहाँ बाढ़ के पानी से बेघर हुए लगभग 200 पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक के तिरपाल तानकर गुजारा करने को मजबूर हैं।
🚗 गाड़ी रुकते ही उमड़ा हुजूम: डिक्की खुलते ही मिनटों में समाप्त हुआ राशन
घटना का पूरा विवरण:
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मदद लेकर पहुंची थीं नेत्री: कटिहार जिला जदयू महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष एवं स्थानीय मुखिया प्रीतम कुशवाहा अपने निजी वाहन में सूखा राशन (चिउड़ा, गुड़, बिस्कुट आदि) के पैकेट लेकर पीड़ितों के बीच पहुंची थीं।
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सैकड़ों लोगों का जमावड़ा: वाहन के रुकते ही राहत की उम्मीद में सैकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे गाड़ी के इर्द-गिर्द एकत्र हो गए।
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सब्र का टूटा बांध: जैसे ही वाहन की डिक्की खोली गई, राशन पाने की होड़ में लोग सीधे गाड़ी के भीतर हाथ डालकर पैकेट निकालने लगे।
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असहाय रह गईं नेत्री: भारी भीड़ और भोजन की तड़प के आगे वितरण व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई और देखते ही देखते कुछ ही मिनटों में समूचा वाहन खाली हो गया।
🗣️ ‘कई दिनों से भूखे थे लोग’: जदयू नेत्री प्रीतम कुशवाहा ने बयां किया दर्द
नेत्री की प्रतिक्रिया और मानवीय दृष्टिकोण:
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भूख और लाचारी का परिणाम: घटना के बाद जदयू नेत्री सह मुखिया प्रीतम कुशवाहा ने कहा कि इस घटना को लूट या अव्यवस्था के बजाय पीड़ितों की असहनीय भूख और मजबूरी के रूप में देखा जाना चाहिए।
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गंभीर मानवीय संकट: उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “बाढ़ प्रभावित परिवारों की हालत अत्यंत दयनीय है। जिस गति से लोग राशन पर टूट पड़े, उससे यह स्पष्ट है कि कई दिनों से इन मासूमों को दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हुई है।”
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बेबसी में उठाया कदम: लोगों में इस बात का गहरा डर था कि यदि वे कतार में रहे तो शायद राशन समाप्त हो जाएगा और वे खाली हाथ रह जाएंगे।
⛺ रेलवे ढाला पर तिरपाल के सहारे जिंदगी: सरकारी मदद साबित हो रही नाकाफी
प्रभावित क्षेत्र के मौजूदा हालात:
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सैकड़ों आशियाने जलमग्न: कुर्सेला प्रखंड के निचले इलाकों में गंगा और सहायक नदियों का पानी भर जाने से सैकड़ों कच्चे-पक्के मकान पूरी तरह डूब चुके हैं।
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पटरियों के किनारे शरण: बेघर हुए लोग अपने मवेशियों और बच्चों के साथ रेलवे ट्रैक और ऊंचे ढाला क्षेत्रों में तिरपाल बांधकर शरण लिए हुए हैं।
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अपर्याप्त सरकारी सहायता: स्थानीय विस्थापितों का कहना है कि प्रशासन की ओर से मिलने वाली राहत सामग्री अत्यंत सीमित है, जिसके चलते जब भी कोई जनप्रतिनिधि या सामाजिक संस्था सहायता लेकर पहुंचती है, तो भोजन के लिए ऐसी अफरा-तफरी मच जाती है।





