ब्रेकिंग
Supreme Court Ruling: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला— बच्चों का इंटरनेट इस्तेमाल करना है मौलिक अधिकार Kota Medical College News: कोटा में प्रसूता की संदिग्ध मौत पर हंगामा, सीजेरियन डिलीवरी और इंजेक्शन ल... Banda Road Accident News: उत्तर प्रदेश के बांदा में तेज रफ्तार बाइक ने महिला को मारी टक्कर, इलाज के ... Yogi Adityanath on Navratri 2026: सीएम योगी ने की मां कालरात्रि की आराधना, कहा— '2017 से पहले प्रदेश... RG Kar Medical College Case: आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को मिली जमानत, समिक भट्टाचार्य का ... Pregnancy Scan Guide: प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड क्यों जरूरी है और डॉक्टर एमआरआई (MRI) कराने से क्य... Greater Noida Mystery: ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा में एक ही परिवार के 5 लोगों की संदिग्ध मौत, फूड पॉइजन... Meerut Saurabh Rajput Murder Case: मौत की सजा पाने वाली मुस्कान अब जाएगी हाईकोर्ट, जेल प्रशासन से मा... Lucknow Shiva Sharma Murder Case: करोड़पति कारोबारी हत्याकांड के 9 दिन बाद भी पुलिस की गिरफ्त से दूर... CJP Founder Abhijit Dipke Bail: कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके को कोर्ट से मिली जमानत, 50...
देश

पूर्व सचिव एचसी गुप्ता बरी, JICPL कम्पनी और डायरेक्टर ही निकले दोषी

झारखंड कोयला घोटाले के मामले में आया बड़ा फैसला. दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने झारखंड के महुआगढ़ी कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितता (Irregularity) के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता, संयुक्त सचिव केएस क्रोफा और कोयला आवंटन निदेशक केसी समारिया को बरी कर दिया है.

वहीं मेसर्स जस इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड (JICPL) और इसके डायरेक्टर मनोज कुमार जायसवाल को धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप में दोषी पाया गया है. स्पेशल सीबीआई जज संजय बंसल की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया. केस में दोषियों की सजा पर बहस 8 जुलाई को होगी. सीबीआई के अनुसार कोयला घोटाला मामलों में यह 19वीं सजा है.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 2006-09 के दौरान कोयला मंत्रालय द्वारा निजी कंपनियों को कोयला ब्लॉक आवंटन में भ्रष्टाचार से जुड़ा है. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की शिकायत के आधार पर सीबीआई ने प्रारंभिक जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया था. जांच में पाया गया कि JICPL और इसके डायरेक्टर मनोज जायसवाल ने महुआगढ़ी कोयला ब्लॉक हासिल करने के लिए अपने आवेदन में गलत जानकारी दी और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया. इससे कंपनी को अनुचित लाभ मिला.

कोर्ट की कार्यवाही और सबूत

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी निगरानी में इस मामले की जांच हुई. सीबीआई ने ट्रायल के दौरान 18 गवाहों की जांच की और ठोस सबूत पेश किए. कोर्ट ने पाया कि JICPL और मनोज जायसवाल ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B (आपराधिक साजिश) और धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत अपराध किया है. हालांकि पूर्व अधिकारियों के खिलाफ सबूत पर्याप्त नहीं पाए गए, जिसके चलते उन्हें बरी कर दिया गया.

क्या है कोयला घोटाला?

कोयला घोटाला जिसे कोलगेट के नाम से भी जाना जाता है. यह 2000 के दशक में कोयला ब्लॉकों के आवंटन में अनियमितताओं का मामला है. इसमें निजी कंपनियों को गलत तरीके से कोयला ब्लॉक आवंटित करने के आरोप लगे थे, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ. इस घोटाले की जांच सीबीआई ने की और कई मामलों में सजा भी सुनाई गई. इस मामले में भी JICPL और मनोज जायसवाल की सजा पर 8 जुलाई 2025 को होने वाली सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि दोषियों को कितनी सजा दी जाएगी.

Related Articles

Back to top button