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कॉलेज कमेटी ने शिकायत की अनदेखी की, टीचर की गलत डिमांड से तंग आकर 20 साल की छात्रा ने खुद को जला मारा..ओडिशा केस की पूरी कहानी

ओडिशा से हाल ही में एक ऐसा केस सामने आया है जिसने सभी को चौंका कर रख दिया. बालासोर के एफएम स्वायत्त कॉलेज की 20 साल की बीएड की छात्रा ने खुद को आग लगी ली. छात्रा को एम्स भुवनेश्वर में भर्ती किया गया था. लेकिन, जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद सोमवार की रात को छात्रा की मौत हो गई. चलिए जानते हैं वो एक वजह जिसने छात्रा को खुद को आग लगाने तक के लिए मजबूर कर दिया. इस केस की अनटोल्ड स्टोरी.

बीएड की छात्रा ने हेड ऑफ एजुकेशन डिपार्टमेंट के ऊपर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. इसी के चलते छात्रा ने इस उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई. छात्रा का बाकी छात्रों ने भी साथ दिया और कॉलेज में 1 जुलाई से इसके खिलाफ प्रोटेस्ट हो रहा था. छात्र एजुकेशन डिपार्टमेंट के हेड के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे.

कहां से शुरू हुआ मामला?

खुद को आग लगाने जैसा कदम उठाने से पहले, छात्रा ने उत्पीड़न को लेकर कॉलेज प्रशासन को कई लिखित शिकायतें दी थीं. उसने दावा किया कि फेकल्टी मेंबर ने उसे धमकी दी थी कि अगर वो उसकी बात नहीं मानेगी तो वो उसे एग्जाम में फेल कर देगा, लेकिन अधिकारियों ने छात्रा की लगातार की गई शिकायतों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की.

कई लीखित शिकायतें करने के बाद और कॉलेज में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के बाद भी कोई एक्शन नहीं लिया गया. इसी के बाद 12 जुलाई को वो हुआ जिसकी किसी ने उम्मीद भी नहीं की होगी. 12 जुलाई को छात्रा ने कॉलेज में ही खुद को आग लगा ली. सीसीटीवी में यह कैद हो गया. छात्रा ने जैसे ही खुद को आग लगाई उसको बचाने के लिए एक छात्र भी आग में कूदा. फिलहाल, जो छात्र आग में कूदा था वो भी गंभीर रूप से घायल है और उसका भी इलाज किया जा रहा है.

किन-किन पर हुआ एक्शन?

इस मामले के सामने आने के बाद हंगामा मच गया. कई लोग छात्रा के पक्ष में आ गए और कॉलेज पर सवाल उठाए. जन आक्रोश के बाद, जिस असिस्टेंट प्रोफेसर पर छात्रा ने उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, उसी समीरा कुमार साहू को गिरफ्तार कर सस्पेंड कर दिया गया है. साथ ही कॉलेज के प्रिंसिपल को भी इस मामले को ठीक से न संभालने की वजह से सस्पेंड कर दिया गया और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. ओडिशा उच्च शिक्षा विभाग ने प्रिंसिपल को सस्पेंड करने की वजह मामले में लापरवाही बताया.

गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए, डीआईजी सत्यजीत नायक ने बताया कि प्रिंसिपल पर आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने कहा, जांच सुनिश्चित करने के लिए एक एसटीआई टीम का गठन किया गया है. नाइक ने कहा, टीम में जांचकर्ता, फोरेंसिक एक्सपर्ट और वकील शामिल हैं जो मेडिकल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य इकट्ठा करने और फोरेंसिक विश्लेषण करने पर काम कर रहे हैं.

टीचर पर कौनसी धाराएं लगाई गईं

अपराध के दिन ही प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया गया था, जबकि आरोपी शिक्षक को उसी दिन बीएनएस धारा 75(1)(ii) (यौन संबंधों की मांग या अनुरोध), 79 (महिला की गरिमा का अपमान), 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 351(2) (आपराधिक धमकी) और 3(5) (सामान्य इरादा) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था.

परिवार ने किए कई दावे

छात्रा के पिता ने मामले में कई अहम खुलासे किए. दावा किया कि कॉलेज प्रशासन ने उनकी बेटी पर शिकायत वापस लेने का दबाव डाला था. उन्होंने बताया कि मेरी बेटी खुद को आग लगाने से पहले प्रिंसिपल से मिली थी. उन्होंने आगे कहा, मेरी बेटी के दोस्तों ने मुझे बताया कि उसने प्रिंसिपल से मिलने के कुछ ही मिनट बाद खुद को आग लगा ली. वह अपने आरोपों की जांच कर रही आंतरिक शिकायत समिति के निष्कर्ष जानने के लिए उनके पास गई थी.

पिता ने कहा, प्रिंसिपल ने मेरी बेटी को बताया कि आईसीसी को शिक्षा विभाग की प्रमुख समीरा कुमार साहू के खिलाफ उसके यौन उत्पीड़न के आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस खबर से उसकी मानसिक परेशानी और बढ़ गई होगी, जिसकी वजह से उसने खुद को आग लगा ली है. मामले में परिवार जांच की मांग कर रहा है. साथ ही बेटी के चले जाने से परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है.

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