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ओडिशा में 1,396 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी ने पोर्श, बीएमडब्ल्यू और आभूषण जब्त किए

ईडी ने शनिवार को देश के सबसे बड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों में से एक की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत ओडिशा के भुवनेश्वर में तलाशी अभियान चलाया. इस छापेमारी के दौरान एजेंसी ने बड़ी मात्रा में कीमती सामान और दस्तावेज बरामद किए हैं. ED ने अपनी कार्रवाई में करीब 7 करोड़ रुपये की 10 लग्जरी गाड़ियां और 3 सुपरबाइक्स ज़ब्त की हैं. इनमें पोर्श कायेन, मर्सिडीज़-बेंज जीएलसी, BMW, एक्स7, ऑडी ए3, मिनी कूपर और प्रीमियम होंडा गोल्ड विंग मोटरसाइकिल शामिल हैं.

ED ने 1.12 करोड़ रुपये की ज्वेलरी, 13 लाख रुपये कैश और अचल संपत्तियों से जुड़े कई अहम दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए हैं. दो लॉकर भी जब्त किए हैं. शक्ति रंजन दाश के आवास और उनकी कंपनियों मेसर्स अनमोल माइंस प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स अनमोल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालयों पर छापेमारी की गई. यह कार्रवाई मेसर्स इंडियन टेक्नोमैक कंपनी लिमिटेड द्वारा की गई 1,396 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले में की गई थी. धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के प्रावधानों के तहत की गई.

1396 करोड़ रुपये के बैंक घोटाला

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, आईटीसीओएल और उसके डायरेक्टरों ने साल 2009 से 2013 के बीच बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के एक ग्रुप से धोखाधड़ी कर कर्ज लिए थे. ईडी का आरोप है कि इस दौरान इन्होंने बैंकों को गुमराह करने के लिए फर्जी विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्टें प्रस्तुत कीं और फर्जी बिक्री दिखाई. ये कर्ज कभी भी उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं किए गए. इससे पहले ईडी ने इस मामले में कुल 310 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की थीं. अप्रैल 2025 में कुर्क की गई संपत्तियों में से 289 करोड़ रुपये की संपत्ति बैंकों के संघ को लौटा दी गई.

ईडी की जांच जारी

जांच में सामने आया कि ITCOL और इससे जुड़ी कुछ फर्जी कंपनियों ने लगभग 59.80 करोड़ रुपये की राशि अनमोल माइंस प्राइवेट लिमिटेड (AMPL), ओडिशा के बैंक खातों में ट्रांसफर की. ED के अनुसार AMPL के MD शक्ति रंजन दाश ने जानबूझकर ITCOL के राकेश कुमार शर्मा की मदद की ताकि बैंक से मिले कर्ज को दूसरी जगह भेजा जा सके और ओडिशा में खनन गतिविधियों में उसका उपयोग किया जा सके. शक्ति रंजन दाश ने इस धनराशि (अपराध की आय) को AMPL के खातों में जमा किया जिसे कंपनी ने अपने वैध इनकम के रूप में दिखाया. इस मामले की जांच अभी जारी है.

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