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मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश में हाईवे किनारे कैसे खुल गईं शराब दुकानें? हाई कोर्ट का सरकार से जवाब तलब

जबलपुर : मध्य प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का खुलकर उल्लंघन हो रहा है. सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से शराब दुकान कम से कम 500 मीटर अंदर होनी चाहिए लेकिन मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर मुख्य सड़कों पर ही दुकान खुली हुई हैं. इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है.

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में दी थी गाइडलाइन

राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज गति से वाहन चलते हैं और ऐसी स्थिति में यदि ड्राइवर ने शराब पी रखी हो तो दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. अक्सर ऐसा देखा गया है कि ज्यादातर एक्सीडेंट उन्हीं वाहनों के होते हैं जिसमें ड्राइवर ने शराब पी रखी थी. इसे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में एक गाइडलाइन बनाई थी कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर शराब बिक्री ना हो और शराब दुकान कम से कम राष्ट्रीय राजमार्ग से आधा किलोमीटर दूर होनी चाहिए ताकि ड्राइवर आसानी से शराब दुकान तक ना पहुंच सके.

हाईवे से 500 मीटर दूर होनी चाहिए शराब दुकान

इसके बाद यह सर्कुलर पूरे देश में भेजा गया. कुछ राज्यों ने इसका पालन किया लेकिन मध्य प्रदेश इसके पालन में बहुत पीछे है. मध्य प्रदेश में न केवल राष्ट्रीय राजमार्ग बल्कि बस स्टैंड पर भी शराब दुकानें हैं. भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता राशिद नूर खान ने सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में जानकारी दी और पत्र व्यवहार किया. इसमें कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार राज्य सरकार भी स्टेट और नेशनल हाईवे से शराब दुकानों को हटाकर 500 मी भीतर करे.

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

इसके बाद भी सरकार ने अपनी नीति में परिवर्तन नहीं किया और ना ही दुकानों के स्थान परिवर्तित किए गए. एडवोकेट आर्यन उर्मलिया ने बताया “मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है. राज्य सरकार के आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव और केंद्र सरकार के सड़क एवं परिवहन मंत्रालय से पूछा गया है कि आखिर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन क्यों नहीं किया.”

कॉलोनियों में खुली शराब की दुकानें

याचिका में कहा गया है “मध्य प्रदेश में अभी भी कई दुकानें स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे पर हैं और इनकी वजह से ड्राइवर शराब पीकर गाड़ी चला रहे हैं और एक्सीडेंट का शिकार हो रहे हैं. मध्य प्रदेश की जनता शराबखोरी से परेशान है. एक तरफ नेशनल हाईवे पर दुकानें खुली हुई हैं, जिनकी वजह से एक्सीडेंट हो रहे हैं. दूसरी तरफ कॉलोनी और बस्तियों के भीतर दुकान खोल दी गई हैं.”

इनकी वजह से युवा नशे का शिकार हो रहे हैं लेकिन सरकार आंखें मूंदे बैठी है. जबलपुर की कई बस्ती और मोहल्ले में लोगों ने इन दुकानों का विरोध भी किया लेकिन ये दुकानें बंद नहीं हुईं.

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