ब्रेकिंग
लोकसभा के बाद अब राज्यसभा से भी पास हुआ 'एंटी पेपर लीक बिल', राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून जोशीमठ के किमाणा गांव में भू-धंसाव से हड़कंप! चंडिका माता मंदिर क्षतिग्रस्त, प्राथमिक विद्यालय और पं... दिल्ली सरकार की बड़ी पहल: 'विद्या वाहिनी' योजना के तहत 1.40 लाख छात्राओं को मिलेगी मुफ्त साइकिल! CM ... 'Idiots' और 'Andhbhakts' टिप्पणी पर घिरे राहुल गांधी: अनुराग ठाकुर ने विशेषाधिकार समिति को मामला भेज... हरियाणा मतदाता सूची पुनरीक्षण: 26.29 लाख वोटरों के रिकॉर्ड में मिलीं गड़बड़ियां, 33 लाख नाम ड्राफ्ट ... समालखा नगर परिषद में सियासी ड्रामे का पटाक्षेप! मनीषा कुहाड़ निर्विरोध बनीं वाइस चेयरपर्सन हरियाणा में JBT शिक्षकों की TGT पदोन्नति प्रक्रिया तेज! 13 अगस्त तक मांगे आवेदन, DEEO पर गाज की तैया... ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: 'गोल्डन बॉय' नीरज चोपड़ा का धमाकेदार प्रदर्शन, जैवलिन थ्रो के फाइनल मे... पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: धारा 24(2) का सहारा लेकर नहीं खोले जा सकते दशकों पुराने भू... राज्यसभा में उठी गुरुग्राम में हाईकोर्ट सर्किट बेंच की मांग! सांसद संजय भाटिया ने 'टॉवर ऑफ जस्टिस' क...
मध्यप्रदेश

Satna News: हाईकोर्ट से जमानत मिली पर घरवाले नहीं ले जाना चाहते साथ; सतना जेल में अपनों की राह देख रहे 5 कैदी

सतना: केंद्रीय जेल में अपने गुनाहों की सजा काट रहे 5 बंदियों को हाई कोर्ट से मिली जमानत, लेकिन पांचों बंदी जमानतदार की राह देख रहे हैं. जेल प्रशासन ने उनके परिजनों से संपर्क भी किया, लेकिन कोई भी जमानत लेने को तैयार नहीं है. 5 बंदियों में 2 बुजुर्ग बंदी भी शामिल हैं. अगर इनकी किसी ने जमानत नहीं ली, तो सजा रहेगी बरकरार. पूरी सजा जेल में काटनी पड़ेगी.

जमानत के बाद भी नहीं रिहा हुए कैदी

केंद्रीय जेल प्रबंधन से मिली जानकारी के मुताबिक, “केंद्रीय जेल सतना में अलग अलग मामलों में अपने गुनाहों की सजा काटने वाले 5 बंदियों को हाईकोर्ट से जमानत तो मिल गई है. इसके बावजूद पांचों बंदी जेल में कैद रहने को मजबूर हैं. क्योंकि नियम के अनुसार जमानत के बाद बंदियों के जमानतदार (परिजन) को बेल- बॉन्ड भरना पड़ता है. इसके बाद ही कैदी की रिहाई होती है. जेल प्रशासन इन कैदियों की रिहाई के लिए परिजनों से लगातार संपर्क कर रहा है, लेकिन परिवार वाले रिहाई करवाकर उन्हें ले जाने को तैयार ही नहीं हैं.

हत्या-दुष्कर्म जैसे अपराध की काट रहे सजा

इन पांचों बंदियों को जब यह पता लगा कि उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल गई और वे सभी जेल से बाहर जा सकेंगे. इस बात से वह बेहद खुश थे, लेकिन अब उनके अंदर निराशा छाई हुई है. क्योंकि इन कैदियों में किसी एक के भी परिजन बेल बॉन्ड की राशि नहीं भर रहे हैं. ऐसे में सभी कैदी जेल से रिहा नहीं होंगे और उनकी आगे की सजा यथावत रहेगी. ये हत्या, दुष्कर्म जैसे अपराध की सजा काट रहे हैं.

परिजनों के इंतजार में ये बंदी

इन कैदियों में एक रायसेन जिले का, दूसरा बिहार के बेलदौर खगड़िया जिले का, दो पन्ना जिले और एक सतना जिले का निवासी है. इनके नाम रामकीर्तन पिता गुरुजन उम्र 78 वर्ष निवासी रायसेन जिला, दूसरा इमाम खान पिता गुलाब खान उम्र 52 वर्ष निवासी पन्ना जिला, तीसरा गणेश शर्मा पिता दिलीप शर्मा उम्र 30 वर्ष निवासी बिहार बेलदौर खगड़िया जिला, चौथा नत्थू प्रजापति पिता बौरा प्रजापति उम्र 36 वर्ष निवासी थाना देवेंद्र नगर जिला पन्ना, पांचवां राजा भैया डोहर पिता भूरा डोहर उम्र 35 वर्ष निवासी ग्राम किटहा हरिजन बस्ती सतना जिला का रहने वाला है.

परिजन नहीं करवा रहे कैदियों की रिहाई

इस बारे में जेल अधीक्षक लीना कोष्टा का कहना है कि “केंद्रीय जेल सतना में वर्तमान समय में 5 ऐसे बंदी हैं, जिनको माननीय उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है, लेकिन वह रिहा नहीं हो पा रहे हैं. इसका कारण यह है कि उनके परिजन जमानत (बेल बॉन्ड) न्यायालय में पेश नहीं कर पा रहे हैं. जेल प्रशासन द्वारा लगातार बंदियों के परिजनों से संपर्क किया जा रहा है, लेकिन कोई भी उनकी जमानत भरने के लिए आगे नहीं आ रहा है. अगर जमानत नहीं भर पाएंगे तो बंदियों को जो भी सजा है, उनको पूरी सजा जेल में काटनी पड़ेगी. दो बंदी बुजुर्ग भी शामिल हैं. यह एक संवेदनशील मामला है. वहीं बंदी भी बहुत निराश है. अब बंदी भी यह मान रहे हैं कि अगर परिजन जमानत नहीं भर पा रहे तो वह आगे की सजा अब जेल में ही काटेंगे.”

Related Articles

Back to top button