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छत्तीसगढ़

माघ पूर्णिमा पर छत्तीसगढ़ में आस्था का सैलाब: बलौदाबाजार मेले के लिए CM ने बढ़ाया बजट, कबीरधाम में उमड़ी भारी भीड़

बलौदा बाजार: माघ पूर्णिमा के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय समागम इस बार भी भव्यता और श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के एक दिवसीय दौरे के दौरान बलौदा बाजार के कबीरधाम दामाखेड़ा में आयोजित सतगुरु कबीर धर्मदास साहब स्मृति संत समागम (माध मेला 2026) ने न केवल आध्यात्मिक माहौल बनाया, बल्कि जिले की प्रशासनिक और सांस्कृतिक क्षमता का भी परिचय दिया

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मेला व्यवस्था के लिए पहले तय 52 लाख की राशि को बढ़ाकर 77 लाख करने की घोषणा की. यह निर्णय मेले की बेहतर व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं की सुविधा और आयोजन की भव्यता को ध्यान में रखते हुए लिया गया.

मुख्यमंत्री का दौरा और आध्यात्मिक आशीर्वाद

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मीडिया से बातचीत में कहा, हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कबीरधाम नगर दामाखेड़ा में अंतर्राष्ट्रीय समागम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर देश और विदेश से कबीर पंथ के अनुयायी उपस्थित हुए. मुख्यमंत्री ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन पूज्य उदित मुनि नाम साहिब का चादर तिलक हुआ और उन्होंने स्वयं 16वें वंशाचार्य श्री उदित मुनि नाम साहेब से भेंट कर उनके आशीर्वाद प्राप्त किया.

मुख्यमंत्री ने कहा, कबीरधाम का आशीर्वाद हमेशा से मिलता रहा है और भविष्य में भी मिलता रहेगा. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस आयोजन से न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण को बढ़ावा मिलता है, बल्कि राज्य की खुशहाली और सांस्कृतिक समृद्धि में भी योगदान मिलता है. उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को माघ पूर्णिमा की शुभकामनाएं दी.

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप

मेले में इस वर्ष देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु पहुंचे. महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक सहित अन्य राज्यों के कबीर पंथी बड़ी संख्या में आए हुए थे. इसके अलावा, विदेशों से भी कुछ अंतर्राष्ट्रीय श्रद्धालु आए, जिन्होंने इस धार्मिक आयोजन में भाग लिया. मेले की भव्यता को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने विशेष रूप से सुरक्षा, पार्किंग, चिकित्सा सहायता, जलपान और बैठने की व्यवस्था की थी.

प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा का पूर्ण इंतजाम

मेले के दौरान जिला प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय रहा. बलौदाबाजार के कलेक्टर, एसपी, स्थानीय अधिकारी और कर्मचारियों आयोजन स्थल पर मौजूद रहे. उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, प्राथमिक चिकित्सा, पेयजल और साफ-सफाई सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. इस अवसर पर प्रशासन ने मेला स्थल पर प्रवेश और निकास मार्गों का स्पष्ट चिन्हांकन किया, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से कार्यक्रम में भाग ले सकें.

राजनीतिक हस्तियों की रही मौजूदगी

मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, भांठापारा विधायक इन्द्र कुमार साव, पंडरिया विधायक भावना बोहरा, साजा विधायक ईश्वर साहू, राजनांदगाव के पूर्व सांसद अभिषेक पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे. इन वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों की उपस्थिति से न केवल मेला आयोजन को वैधानिक और प्रशासनिक मान्यता मिली, बल्कि श्रद्धालुओं में विश्वास और उत्साह भी बना रहा.

आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश

मेले का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं था. यह आयोजन कबीर पंथ के आध्यात्मिक संदेशों और सामाजिक समरसता को भी प्रदर्शित करता है. श्रद्धालु यहां आकर सिर्फ पूजा-अर्चना ही नहीं करते, बल्कि मानवता, अहिंसा और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों को भी सीखते हैं. मुख्यमंत्री ने भी अपने संबोधन में कहा कि कबीरधाम का आशीर्वाद राज्य की खुशहाली और सामाजिक एकता के लिए प्रेरणादायक है. उन्होंने विश्वास जताया कि इस आयोजन से आने वाले वर्षों में राज्य में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को और मजबूती मिलेगी.

मेला व्यवस्थाओं में सुधार और भविष्य की योजनाएं

मुख्यमंत्री द्वारा मेला व्यवस्था के लिए अतिरिक्त 25 लाख रुपये की घोषणा का सीधा असर श्रद्धालुओं की सुविधा में दिखाई देगा. यह राशि विशेष रूप से सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, स्वच्छता, भोजन, पेयजल और बैठने की सुव्यवस्थित व्यवस्था पर खर्च की जाएगी. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मेला स्थल पर हर वर्ष की तरह अंतर्राष्ट्रीय श्रद्धालुओं के लिए भी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि सभी एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण में धार्मिक आयोजन में भाग ले सकें.

मेले में युवाओं और बच्चों की भी विशेष भागीदारी रही. स्थानीय स्कूल और युवा संगठनों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, भजन, गीत और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए. इससे मेले का स्वरूप न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी समृद्ध हुआ. युवाओं ने यह अनुभव किया कि धार्मिक आयोजन केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और अनुशासन के प्रतीक भी हो सकते हैं.

स्थानीय विकास और पर्यटन पर प्रभाव

माघ पूर्णिमा का यह अंतर्राष्ट्रीय समागम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन के लिए भी फायदेमंद है. लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन और छोटे उद्योगों को सीधा लाभ मिला. मुख्यमंत्री ने भी इस पहलू को ध्यान में रखते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों से राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं.

सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक समरसता का उदाहरण बना

बलौदाबाजार का माघ पूर्णिमा मेला 2026 न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि प्रशासनिक कुशलता, सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक समरसता का भी उदाहरण बना. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा मेला व्यवस्था के लिए धनराशि बढ़ाने की घोषणा, उनके दौरे के दौरान आशीर्वाद प्राप्त करना और जिले के प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता ने यह सुनिश्चित किया कि यह आयोजन पूरी तरह से सफल और सुव्यवस्थित रहे.

इस भव्य आयोजन ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आस्था, प्रशासनिक कुशलता और सामाजिक सहभागिता मिलकर किसी भी पर्व या समारोह को सफल और यादगार बना सकती है. बलौदा बाजार के कबीरधाम दामाखेड़ा का यह अंतर्राष्ट्रीय समागम, आने वाले वर्षों में भी श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल के रूप में अपनी पहचान बनाए रखेगा.

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