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Israel-Lebanon War: लेबनान पर हमले की तैयारी में इजराइल, हिजबुल्लाह के ठिकानों को खत्म करने का पूरा मास्टरप्लान; जानें युद्ध की 5 बड़ी वजहें

इजराइल अब लेबनान में बड़े जमीनी सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है. इजराइल की योजना दक्षिणी लेबनान के उस पूरे इलाके पर कब्जा करने की है जो लितानी नदी के दक्षिण में आता है. साथ ही वह वहां मौजूद हिजबुल्ला के सैन्य ढांचे और हथियारों को खत्म करना चाहता है. इजराइली और अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अगर यह अभियान शुरू होता है तो यह 2006 के युद्ध के बाद लेबनान में इजराइल का सबसे बड़ा जमीनी हमला होगा. इजराइल के एक सीनियर अफसर ने कहा कि सेना वही रणनीति अपनाएगी जो उसने गाजा में अपनाई थी. यानी जिन इमारतों में हिज्बुल्लाह के हथियार छिपे होने या हमलों की तैयारी करने की जानकारी मिलेगी, उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा. अमेरिकी मीडिया एक्सियोस ने यह जानकारी दी है.

इतने बड़े सैन्य अभियान का मतलब यह भी हो सकता है कि दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना लंबे समय तक तैनात रहे. इस वजह से लेबनान की सरकार काफी चिंतित है. उसका कहना है कि हिज्बुल्लाह द्वारा इजराइल पर रॉकेट दागे जाने के बाद शुरू हुआ यह युद्ध पूरे देश को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. ट्रंप का प्रशासन हिज्बुल्लाह को कमजोर करने के लिए इजराइल के इस बड़े अभियान का समर्थन कर रहा है. हालांकि अमेरिका चाहता है कि लेबनान की सरकारी इमारतों और बुनियादी ढांचे को कम से कम नुकसान पहुंचे. साथ ही अमेरिका युद्ध के बाद इजराइल और लेबनान के बीच सीधे बातचीत कराने की कोशिश भी कर रहा है.

लेबनान पर इजराइल का क्या स्टैंड था?

कुछ दिन पहले तक बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार लेबनान में बढ़ते तनाव को सीमित रखना चाहती थी, क्योंकि इजराइल का मुख्य ध्यान ईरान पर था. लेकिन हालात तब बदल गए जब हिज्बुल्लाह ने ईरान के साथ मिलकर इजराइल पर बड़ा हमला किया. इस हमले में 200 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं और ईरान ने भी दर्जनों मिसाइलें छोड़ीं. एक इजराइली अधिकारी ने कहा कि इस हमले से पहले लेबनान में युद्धविराम की संभावना थी, लेकिन अब बड़े सैन्य अभियान से पीछे हटना मुश्किल है.

इजराइली सेना (IDF) पहले से ही लेबनान सीमा पर तीन बख्तरबंद और पैदल सेना डिवीजन तैनात कर चुकी है. पिछले दो हफ्तों में कुछ सीमित जमीनी घुसपैठ भी की गई है. अब सेना ने सीमा पर और सैनिक भेजने और अतिरिक्त रिजर्व फोर्स को भी बुलाने का फैसला किया है. इजराइल का लक्ष्य दक्षिणी लेबनान के इलाके पर नियंत्रण करना, हिज्बुल्लाह को सीमा से दूर धकेलना और गांवों में बने उसके सैन्य ठिकानों और हथियारों के भंडार को नष्ट करना है.

हिज्बुल्लाह ने इजराइल को धमकी दी

दूसरी ओर हिज्बुल्लाह के नेता नईम कासिम ने कहा कि लेबनान सरकार की कूटनीतिक कोशिशें देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा को बचाने में सफल नहीं रहीं. इसलिए अब प्रतिरोध ही इकलौता रास्ता है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इजराइल जमीनी हमला करता है तो यह उसके लिए जाल साबित होगा, क्योंकि नजदीक की लड़ाई में हिज्बुल्लाह के लड़ाके इजराइली सेना को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

इस संघर्ष के कारण दक्षिणी लेबनान में बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं. अब तक करीब 8 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं और कम से कम 773 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई आम नागरिक शामिल हैं.

इस बीच अमेरिका ने इजराइल से कहा है कि वह बेरुत-रफिक हरीरी इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अन्य सरकारी ढांचों को निशाना न बनाए. इजराइल ने एयरपोर्ट को नुकसान न पहुंचाने पर सहमति जताई है, लेकिन बाकी सरकारी ढांचे को बचाने का वादा नहीं किया है. शुक्रवार को इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में एक पुल पर हमला किया, क्योंकि उसके अनुसार हिज्बुल्लाह उस रास्ते से हथियार और सैनिक भेज रहा था.

कूटनीतिक पहल भी जारी हैं

युद्ध के दौरान लेबनान से जुड़े मामलों को संभालने की जिम्मेदारी इजराइल ने पूर्व मंत्री रॉन डर्मर को दी है. वे अमेरिका से संपर्क बनाए रखेंगे और अगर इजराइल और लेबनान के बीच सीधी बातचीत शुरू होती है तो उसे भी संभालेंगे. अमेरिका की ओर से यह जिम्मेदारी मसाद बोलोस को दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक., लेबनान सरकार ने भी संकेत दिया है कि वह बिना किसी शर्त के तुरंत युद्धविराम पर बातचीत के लिए तैयार है. अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि इस बातचीत के जरिए एक बड़ा समझौता हो सके और 1948 से चल रही इजराइल और लेबनान के बीच युद्ध की स्थिति को औपचारिक रूप से खत्म किया जा सके.

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