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पंजाब

सावधान! ‘प्योर वॉटर’ की बोतल खोलते ही उड़े होश; अंदर का नजारा देख आप भी पीना छोड़ देंगे पानी

अरे भाई! आजकल बाजार में पानी की बोतल उठाओ तो लगता है जैसे लॉटरी खरीद ली हो — कभी प्लास्टिक के कण, कभी कीड़े, कभी बदबू और अब तो सील बंद बोतल में सफेद रूई जैसा फंगस तैरता हुआ मिल रहा है! बिसलेरी वालों ने तो कमाल कर दिया। “Bisleri means business” का नारा अब बदलकर “Bisleri means fungus” हो गया है क्या?

कल्पना कीजिए आप रेस्तरां में बैठे हो, खाना ऑर्डर किया, बिल 9,000 रुपये का आया। कस्टमर ने बोतल खोली तो अंदर सफेद-चमकदार फंगस तैर रहा है। कस्टमर ने कहा — “भाई, ये पानी नहीं, कॉटन कैंडी वाला फंगस है!” रेस्तरां मालिक ने चेक किया तो एक कार्टन में चार बोतलें ऐसी ही निकलीं। सील intact, expiry दूर, लेकिन अंदर फंगस पार्टी चल रही है।

ये कोई पुरानी खबर नहीं। हाल ही में भी ऐसे मामले सामने आए हैं जहां सील बंद बिसलेरी की 1 लीटर बोतल में सफेद फंगस मिला। कोर्ट ने भी एक केस में बिसलेरी को 25,000 रुपये कंपेंसेशन देने को कहा था क्योंकि बोतल में दूषित पानी था। कंपनी ने कहा “बोतल धूप में छोड़ दी थी इसलिए फंगस हो गया” — लेकिन कोर्ट ने पूछा, “भाई, तुम्हारी क्वालिटी चेक कहाँ गई?”

ऐसे में सवाल उठते हैं कि क्या बिसलेरी की 10-स्टेप प्यूरीफिकेशन प्रोसेस सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा है? क्या फैक्ट्री में सनलाइट एक्सपोजर, स्टोरेज की लापरवाही, या प्रोडक्शन लाइन पर साफ-सफाई की कमी है? और सबसे बड़ा सवाल — हम रोज जो पानी पी रहे हैं, वो शुद्ध है या संक्रमित?

भारत में पैकेज्ड वॉटर का बाजार हजारों करोड़ का है। बिसलेरी जैसे ब्रांड सालों से “ट्रस्ट” बेच रहे हैं। लेकिन जब सील बंद बोतल में फंगस मिलता है तो विश्वास डगमगा जाता है। लोग कहते हैं “घर का पानी उबाल के पी लो” — लेकिन शहरों में तो टैप वॉटर पर भी भरोसा नहीं। फिर विकल्प क्या?

फंगस सिर्फ बिसलेरी में नहीं, दूसरे ब्रांड्स में भी रिपोर्ट्स आती रहती हैं। लेकिन बिसलेरी तो मार्केट लीडर है। जिम्मेदारी भी उसी की ज्यादा है। कंज्यूमर फोरम, FSSAI — सबको सख्ती करनी चाहिए। हर बैच की टेस्टिंग अनिवार्य हो, स्टोरेज गाइडलाइंस फॉलो न करने पर भारी जुर्माना हो।

अब आप सोच रहे होंगे — “अरे यार, एक-दो केस से ब्रांड खराब नहीं होता।” सही है। लेकिन जब बार-बार ऐसे मामले आते हैं, तो लगता है क्वालिटी कंट्रोल सिर्फ बोतल पर लिखा हुआ शब्द है, हकीकत में नहीं।

ऐसे में यही सलाह दी जाती है कि बोतल खरीदते समय expiry चेक करो, लेकिन सील खोलने के बाद भी अंदर देखो। अगर फंगस या कुछ गड़बड़ दिखे तो फोटो/वीडियो लेकर कंपनी और FSSAI को शिकायत करो। बेहतर है कि घर पर अच्छा वॉटर प्यूरीफायर यूज करो या विश्वसनीय सोर्स से पानी लाओ। बिसलेरी वालों, अब “पानी की शुद्धता” का दावा करने से पहले अपनी बोतलों को फंगस-फ्री बनाओ। वरना लोग बोतल देखकर ही मुंह फेर लेंगे। पानी तो जीवन है, लेकिन फंगस वाला पानी तो जहर बन जाता है। स्वास्थ्य का ख्याल रखो, दोस्त। और अगली बार बोतल खोलते समय “चीयर्स” कहने से पहले अंदर जरूर झांक लेना।

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