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Jaggi Murder Case: जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी की याचिका पर 23 अप्रैल को SC में सुनवाई, क्या सरेंडर से मिलेगी छूट? जानें पूरा मामला

नई दिल्ली : जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी ने अपनी सजा के खिलाफ दायर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.जिस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 23 अप्रैल को आएगा. आज अमित जोगी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा, सिद्धार्थ दवे और शशांक गर्ग अमित जोगी की ओर से पेश हुए, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा मृतक पीड़िता के पिता की ओर से पेश हुए.आपको बता दें कि जोगी ने अपने सजा के खिलाफ निर्धारित समय के भीतर अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने से छूट मांगी है.

23 अप्रैल को होगी याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रामावतार जग्गी हत्याकांड के दोषी पूर्व विधायक अमित जोगी की दायर याचिका पर 23 अप्रैल की तारीख तय की.इसमें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को बरी किए जाने के फैसले को पलटने, दोषी ठहराए जाने और तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिए गए हैं. अमित जोगी ने अपनी याचिका में अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने से छूट की मांग की है.

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आज दोनों मामलों को संयुक्त सुनवाई के लिए टैग कर दिया है – दिनांक 25.03.2026 को अपील की अनुमति देने के आदेश को चुनौती देने वाली मेरी एसएलपी और दिनांक 2 अप्रैल के उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ मेरी वैधानिक अपील दोनों मामले 23 अप्रैल को संयुक्त सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी,विवेक तन्खा,सिद्धार्थ दवे और शशांक गर्ग आज मेरी ओर से पेश हुए. मैं अपनी कानूनी टीम का बहुत आभारी हूं.मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है-अमित जोगी, पूर्व विधायकअमित अजीत जोगी

कौन कर रहा है मामले की सुनवाई

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अमित जोगी की याचिका को जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा उनकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को चुनौती देने वाली मुख्य अपील के साथ टैग की है. दोनों मामलों को 23 अप्रैल को संयुक्त सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है.

क्या है रामावतार जग्गी हत्याकांड ?

यह मामला 2003 में एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की हत्या से जुड़ा है. 2007 में, ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया. हालांकि, उच्च न्यायालय ने अब उस निष्कर्ष को पलट दिया है और उसे दोषी ठहराया.अमित जोगी को तीन सप्ताह की निर्धारित समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है.मामले में पिछली सुनवाई के दौरान, अदालत ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली जोगी की याचिका पर सीबीआई और छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया था.

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