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चीनी हेलीकॉप्टरों की उड़ान के बाद लद्दाख में अलर्ट, भारतीय वायुसेना ने उड़ाए सुखोई-30 लड़ाकू विमान

भारत और चीन सीमा पर तनाव के बीच पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में देशों की सेना एक-दूसरे पर कड़ी निगरानी बनाए हुए है। भारतीय सेना चीनी सैनिकों की हर हरकत पर नजर रखे हुए है और लद्दाख में अलर्ट है। सूत्रों ने बताया कि पांच मई को दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच झड़प के बाद क्षेत्र में चीन-भारत सीमा के निकट चीन के कम से कम दो हेलीकॉप्टरों को उड़ान भरते देखा गया। इसके बाद भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 लड़ाकू विमानों ने भी वहां उड़ान भरी। हालांकि भारतीय वायुसेना (IAF) के सूत्रों ने बताया कि सुखोई-30 लड़ाकू विमानों समेत उसके विमानों ने नियमित उड़ान भरी थी। उन्होंने कहा कि चीनी पक्ष द्वारा क्षेत्र में भारतीय हवाई क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया गया था।

भारतीय वायुसेना लेह और थोईस एयरबेस से इस क्षेत्र में नियमित रूप से उड़ानें भरती है लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले एक हफ्ते से इलाके में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।बता दें कि पिछले हफ्ते क्षेत्र में पैंगोंग झील के निकट दोनों पक्षों के लगभग 250 सैनिकों के बीच झड़प हुई थी जिसमें कई सैनिक घायल हुए थे। झड़प के बारे में पूछे जाने पर सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के सैनिक अपने-अपने स्थानों पर बने रहे। हालांकि तनाव और बढ़ने की आशंका में अतिरिक्त टुकड़ियों को लाया गया। सेना के प्रवक्ता ने पूछे जाने पर कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर झड़प और आक्रामक रूख की घटनाएं हुई हैं। स्थानीय स्तर की बातचीत और संवाद के बाद ये गश्ती दलों का मतभेद दूर हो जाता है।

सीमा के मामले का समाधान नहीं होने के कारण अस्थायी और अल्प अवधि के लिए झड़पें होती हैं। उन्होंने कहा कि मैं स्पष्ट करता हूं कि पैंगोंग त्सो झील में लगातार तनातनी नहीं रही है और क्षेत्र में सशस्त्र सैनिकों का जमावड़ा नहीं है। बता दें कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच इस तरह की घटना पैंगोंग झील के पास अगस्त 2017 में हुई थी। उसके बाद यह ऐसी पहली घटना है। भारत और चीन के सैनिकों के बीच 2017 में डोकलाम ट्राई जंक्शन के पास 73 दिन तक गतिरोध कायम रहा था। उस घटना से दोनों परमाणु सम्पन्न देशों के बीच युद्ध की आशंकाएं भी उत्पन्न हो गई थीं।

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