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PoK Terror Network: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद PoK में फिर सक्रिय हुआ लश्कर; हाफिज सईद के बेटे ने पूर्व पीएम से की मुलाकात

मुजफ्फराबाद/इस्लामाबाद: भारतीय सेना और सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए ऐतिहासिक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindhu) से करारी शिकस्त खाने के बाद, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) एक बार फिर अपने तबाह हो चुके नेटवर्क को पुनर्जीवित करने की नापाक कोशिशों में जुट गया है। इसी रणनीतिक साजिश के तहत, लश्कर चीफ और मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के बेटे हाफिज तल्हा सईद ने हाल ही में पीओके के पूर्व प्रधानमंत्री और ‘ऑल्ल जम्मू एंड कश्मीर मुस्लिम कॉन्फ्रेंस’ के मौजूदा अध्यक्ष सरदार अतीक अहमद खान से उनके पैतृक आवास पर एक गुप्त मुलाकात की है।

अन्तरराष्ट्रीय खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस उच्च स्तरीय बैठक को कश्मीर मुद्दे और घाटी में तथाकथित आजादी की लड़ाई के नाम पर स्थानीय युवाओं को भड़काने और माहौल को भारत विरोधी बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इनपुट्स बताते हैं कि लश्कर-ए-तैयबा अब पीओके में स्थित अवैध मदरसों और अपने मुखौटा सहयोगी संगठनों के जरिए जमीनी स्तर पर नई भर्ती करने और अपनी संदिग्ध गतिविधियों को विस्तार देने में लगा हुआ है। यह खतरनाक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लश्कर से जुड़े कई लॉन्च पैड्स और आतंकी ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया था।

📊 आगामी चुनावों और कश्मीर मुद्दे पर हुई चर्चा: खुफिया एजेंसियों का दावा— ताकत बढ़ाने के लिए स्थानीय नेटवर्क का हो रहा इस्तेमाल

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों का स्पष्ट मानना है कि यह वैश्विक आतंकी संगठन और उससे जुड़े स्लीपर सेल्स नेटवर्क फिर से अपनी खोई हुई ताकत बढ़ाने और नियंत्रण रेखा (LoC) के पास के इलाकों में सक्रिय होने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों से मिली जानकारी के मुताबिक, पूर्व पीएम सरदार अतीक अहमद खान और आतंकी तल्हा सईद के बीच हुई इस बैठक में केवल कश्मीर मुद्दे पर ही रणनीति नहीं बनी, बल्कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में होने वाले आगामी क्षेत्रीय चुनावों को प्रभावित करने और कट्टरपंथियों को राजनीतिक जमीन मुहैया कराने पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

पाकिस्तान हमेशा वैश्विक मंचों और संयुक्त राष्ट्र (UN) में यह झूठा दावा करता रहा है कि उसकी धरती या उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों में इन आतंकी संगठनों से सरकार का कोई संबंध नहीं है। लेकिन जमीनी हकीकत के चलते हर बार इस्लामाबाद पूरी दुनिया के सामने बेनकाब होता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के कई शीर्ष और मुख्यधारा के राजनीतिक नेता विभिन्न सार्वजनिक व धार्मिक कार्यक्रमों में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हाफिज तल्हा सईद के साथ खुलेआम मंच साझा करते और रणनीतिक चर्चा करते नजर आए हैं। आपको बता दें कि तल्हा सईद, संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित वैश्विक आतंकवादी (Global Terrorist) हाफिज सईद का बेटा है।

📱 सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से हड़कंप: पाक पीएम शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह खान भी आतंकी संग आए नजर

इस खौफनाक गठजोड़ की तस्दीक करने वाले कई प्रामाणिक वीडियो इस समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसने वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की किरकिरी करा दी है। इन वीडियो में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बेहद करीबी और देश के राजनीतिक मामलों के मुख्य सलाहकार राणा सनाउल्लाह खान को साफ तौर पर खूंखार आतंकी हाफिज तल्हा सईद के साथ एक ही मंच पर बैठे देखा गया है। राणा सनाउल्लाह फिलहाल पाकिस्तान सरकार में संघीय मंत्री हैं और देश की सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के सबसे कद्दावर और नीति निर्धारक नेताओं में गिने जाते हैं।

सामने आई जानकारियों के अनुसार, यह विवादित मुलाकात पाकिस्तान के फैसलाबाद शहर में आयोजित ‘स्टेबिलिटी ऑफ पाकिस्तान कॉन्फ्रेंस’ के दौरान हुई थी, जहां दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का गर्मजोशी से स्वागत किया था।

⛓️ धार्मिक जलसों में भी उमड़ रहा है नेताओं का हुजूम: पाकिस्तानी राजनीतिक व्यवस्था और आतंकी सिंडिकेट के गठजोड़ पर उठे गंभीर सवाल

सिर्फ राजनीतिक मंच ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक जलसों में भी पाकिस्तानी हुक्मरान आतंकियों की परिक्रमा करते दिख रहे हैं। हाल ही में कट्टरपंथी हसन कुरैशी के जनाजे (अंतिम संस्कार) में भी पाकिस्तान के कई बड़े राजनीतिक और नामचीन धार्मिक नेताओं को तल्हा सईद के साथ बेहद करीब से बातचीत करते और सुरक्षा घेरे में चलते देखा गया। इन तमाम मुलाकातों के लाइव वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर अंतरराष्ट्रीय कम्युनिटी के सामने मौजूद हैं।

हैरानी की बात यह है कि इन सभी कार्यक्रमों में पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े कई स्थानीय, प्रांतीय और क्षेत्रीय नेता भी अग्रिम पंक्ति में मौजूद थे। इस खुले और बेखौफ मेल-मिलाप से अब अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों के बीच यह सवाल और ज्यादा गहरा हो गया है कि क्या फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की पाबंदियों के डर के बावजूद, पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था के शीर्ष हिस्सों के संबंध आज भी इन खूंखार आतंकवादी संगठनों से जस के तस बने हुए हैं।

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