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मध्यप्रदेश

Indore Honeytrap Case: इंदौर हनीट्रैप मामले में बड़ा एक्शन; श्वेता विजय जैन समेत 7 आरोपी भेजे गए जेल

इंदौर: मध्य प्रदेश के सबसे हाई-प्रोफाइल और बहुचर्चित हनीट्रैप मामले (Indore Honeytrap Case) में क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (SIT) ने एक बड़ी कानूनी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसआईटी ने मामले की गहन पूछताछ के बाद इस रैकेट से जुड़े सात मुख्य आरोपियों को कड़े सुरक्षा घेरे के बीच जिला न्यायालय में पेश किया, जहां से माननीय कोर्ट ने सभी की दलीलें सुनने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के सख्त आदेश जारी कर दिए हैं।

जेल भेजे गए मुख्य आरोपियों में श्वेता विजय जैन, अल्का दीक्षित, जयदीप दीक्षित, रेशु चौधरी, लाखन चौधरी, विनोद शर्मा और जितेंद्र पुरोहित शामिल हैं। आपको बता दें कि इस पूरे सनसनीखेज गिरोह और ब्लैकमेलिंग के नेटवर्क का भंडाफोड़ तब हुआ था, जब इंदौर के प्रसिद्ध शराब कारोबारी चिंटू ठाकुर की ओर से इन सभी प्रभावशाली आरोपियों के खिलाफ लिखित में जबरन वसूली और डराने-धमकाने की गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने केस दर्ज कर जाल बिछाया था।

🕵️ हनीट्रैप केस में आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) की धमाकेदार एंट्री: रेशू के घर से वह मोबाइल फोन जब्त जिससे भेजे गए थे आपत्तिजनक फोटो

इसी बीच, इस हाई-प्रोफाइल हनीट्रैप केस में एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मध्य प्रदेश आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) की भी एंट्री हो गई है। राज्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एसआईटी की कार्रवाई से ठीक पहले एटीएस की एक विशेष टीम ने आरोपी रेशू चौधरी के ठिकाने पर अचानक दबिश दी।

एटीएस ने रेशू के घर से वह मुख्य स्मार्टफोन और डिजिटल डिवाइस सफलतापूर्वक जब्त कर ली है, जिसके माध्यम से वीआईपी (VIP) लोगों के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो कथित रूप से अलग-अलग सर्वरों और रसूखदारों को ब्लैकमेल करने के लिए इधर-उधर भेजे गए थे। इस जब्ती के बाद अब साइबर फॉरेन्सिक एक्सपर्ट्स (Cyber Experts) की एक विशेष टीम मोबाइल से डिलीट और फॉरवर्ड किए गए डेटा, चैट लॉग्ज और क्लाउड स्टोरेज को पूरी तरह से रिकवर करने में दिन-रात जुटी हुई है ताकि इस सिंडिकेट के पीछे छिपे अन्य बड़े नामों का पर्दाफाश किया जा सके।

📱 जांच की जद में आया रेशू का बॉयफ्रेंड शुभम: सोमवार को रिमांड समाप्त होने के बाद आरोपियों पर कसा कानूनी शिकंजा

जांच अधिकारियों से मिली ताजा और पुख्ता जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले के तार अब और आगे जुड़ते जा रहे हैं, जिसके चलते मुख्य आरोपी रेशू का बॉयफ्रेंड शुभम भी अब पुलिस और एटीएस की जांच की रडार पर आ गया है। संदेह है कि शुभम को भी इस पूरे ब्लैकमेलिंग नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन की पूरी जानकारी थी, जिसके चलते उससे भी कड़ी पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

तय समय सीमा के अनुसार, सोमवार को इन सभी सात आरोपियों की पुलिस रिमांड की अवधि आधिकारिक रूप से समाप्त हो रही थी। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि रिमांड के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एकत्र किए जा चुके हैं, जिसके बाद अदालत ने मामले की गंभीरता और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए सभी आरोपियों को बिना किसी राहत के सीधे जेल (Judicial Custody) भेज दिया है। इस मामले पर अब पूरे राजनीतिक और प्रशासनिक अमले की निगाहें टिकी हुई हैं।

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