Viral Wedding: विदेशी दुल्हन ने भारतीय रीति-रिवाज से लिए 7 फेरे, लंदन की लड़की बनी तेलंगाना की बहू

Telangana News: कहते हैं कि प्यार की कोई सीमा नहीं होती और न ही यह भाषा या सरहदों का मोहताज होता है. इस बात को सच कर दिखाया है तेलंगाना के आदिलाबाद के एक युवक और लंदन की एक युवती ने. अलग देश, अलग संस्कृति और अलग भाषा होने के बावजूद दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामा और हिंदू परंपराओं के अनुसार विवाह के पवित्र बंधन में बंध गए. इस शादी की अब हर कहीं चर्चा हो रही है.
आदिलाबाद जिला मुख्यालय के कृष्णानगर निवासी भुसेट्टी महेंद्र भारती के पुत्र भुसेट्टी साई चरण करीब दस साल पहले उच्च शिक्षा के लिए लंदन गए थे. पढ़ाई पूरी करने के बाद वो वहीं अपना व्यवसाय करने लगे. इसी दौरान उनकी मुलाकात लंदन के कार्डिफ निवासी मिया मे से हुई. मिया मे, किम हेनोच और गैरेथ हेनोच की पुत्री हैं. धीरे-धीरे यह जान-पहचान गहरी दोस्ती और फिर प्यार में बदल गई. पिछले पांच वर्षों से एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का सपना देख रहे इस जोड़े ने आखिरकार अपने परिवारों को विवाह के लिए राजी कर लिया.
तेलंगाना की परंपराओं ने जीता विदेशी दुल्हन का दिल
पिछले महीने यह जोड़ा भारत आया. मिया मे को भारत की समृद्ध संस्कृति, तेलंगाना की परंपराएं और आदिलाबाद की जलवायु इतनी पसंद आई कि उन्होंने पूरी तरह हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करने का निर्णय लिया. 10 मई को आदिलाबाद के वन क्षेत्र में एक भव्य विवाह समारोह का आयोजन किया गया. मिया मे ने पारंपरिक भारतीय वेशभूषा धारण की और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच साई चरण के साथ सात फेरे लिए.
मौसी और मौसा ने निभाया ‘वधू पक्ष’ का फर्ज
इस विवाह की सबसे खास और भावुक कर देने वाली बात यह रही कि दुल्हन मिया मे के माता-पिता किन्हीं कारणों से भारत नहीं आ सके. ऐसे में रिश्तों की मिठास को बरकरार रखते हुए साई चरण की मौसी वनजा और मौसा नीतीश (बोडाकुंती निवासी) ने बहू की ओर से माता-पिता का फर्ज निभाया और कन्यादान सहित सभी रस्में पूरी कीं.
चर्चा का विषय बनी यह शादी
रिश्तेदारों और दोस्तों की भारी मौजूदगी में संपन्न हुए इस विवाह ने यह साबित कर दिया कि जब दिल मिल जाते हैं, तो भौगोलिक दूरियां मायने नहीं रखतीं. समारोह में मौजूद हर शख्स ने नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया और विदेशी बहू का गर्मजोशी से स्वागत किया. यह अनोखी शादी अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जो वैश्विक युग में सांस्कृतिक मिलन का एक खूबसूरत उदाहरण पेश करती है.






