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मध्यप्रदेश

MP Fake Doctor Arrest: दमोह में बड़ा खुलासा, संजीवनी अस्पतालों में फर्जी MBBS डिग्री पर नौकरी कर रहे 3 ‘डॉक्टर’ गिरफ्तार

दमोह: मध्य प्रदेश के दमोह जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित संजीवनी अस्पतालों में फर्जी एमबीबीएस डिग्री के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले तीन कथित डॉक्टरों को पुलिस ने धर-दबोचा है। इस बड़े और चौंकाने वाले मामले के उजागर होने के बाद स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन में भारी हड़कंप मच गया है। दमोह पुलिस को पुख्ता आशंका है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे अंतर-राज्यीय स्तर पर एक बहुत बड़ा गिरोह (रैकेट) सक्रिय है, जो मोटी रकम लेकर फर्जी मेडिकल डिग्री और मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल के फर्जी रजिस्ट्रेशन के जरिए सरकारी व निजी अस्पतालों में अवैध नियुक्तियां करा रहा था।

🩺 शिकायतों के बाद सीएमएचओ (CMHO) ने बैठाई थी जांच: दमोह एसपी आनंद कलादगी को सौंपे गए थे संदिग्ध दस्तावेज

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे संजीवनी अस्पतालों में कार्यरत कुछ कथित डॉक्टरों की योग्यता और उनके द्वारा लिखे जा रहे पर्चों को लेकर जिला स्वास्थ्य विभाग को लगातार गंभीर शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने एक विशेष जांच टीम का गठन कर संदिग्ध डॉक्टरों के दस्तावेजों का सत्यापन कराया। जांच में डॉक्टरों की डिग्री और मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पूरी तरह संदिग्ध व कूटरचित पाए गए। इसके बाद सीएमएचओ ने बिना समय गंवाए पूरे मामले की लिखित जानकारी और दस्तावेजी सबूत दमोह पुलिस अधीक्षक को कानूनी कार्रवाई के लिए सौंप दिए।

⏳ साल भर से मरीजों की जान से खेल रहे थे फर्जी डॉक्टर: पूछताछ के बाद ग्वालियर, सीहोर और जबलपुर से हुई गिरफ्तारियां

दमोह एसपी आनंद कलादगी ने मामले का आधिकारिक खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस की गहन जांच में सामने आया है कि करीब एक साल पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संजीवनी अस्पतालों में संविदा डॉक्टरों की भर्ती हुई थी। इसमें ग्वालियर के रहने वाले डॉ. कुमार सचिन यादव और सीहोर के रहने वाले डॉ. राजपाल गौर ने फर्जी एमबीबीएस डिग्री लगाकर सरकारी नौकरी हासिल की थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले कुमार सचिन यादव को हिरासत में लिया, जिसने पूछताछ में गिरोह को लेकर कई अहम खुलासे किए। इसके बाद पुलिस ने सह-आरोपी राजपाल गौर को भी गिरफ्तार कर लिया, जिसने पुलिसिया पूछताछ में अपनी डिग्री फर्जी होने की बात कबूल कर ली है।

💻 जबलपुर से पकड़ा गया तीसरा फर्जी डॉक्टर अजय मौर्य: पैसों के बदले नियुक्तियां कराने वाले मुख्य नेटवर्क की तलाश तेज

गिरफ्तार किए गए दोनों मुख्य आरोपियों से जब पुलिस ने रिमांड के दौरान कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने एक और चौंकाने वाला नाम उगला। उन्होंने बताया कि उनकी ही तरह जबलपुर में भी एक व्यक्ति फर्जी मेडिकल डिग्री के आधार पर मरीजों का इलाज कर रहा है और नौकरी पर लगा हुआ है। इस इनपुट के आधार पर दमोह पुलिस की एक विशेष टीम ने तत्काल जबलपुर में दबिश देकर अजय मौर्य नामक तीसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया।

💰 लाखों रुपयों के लेन-देन से हुई थीं अवैध नियुक्तियां: बैक-डोर एंट्री कराने वाले मास्टरमाइंड की तलाश में पुलिस की छापेमारी

एसपी आनंद कलादगी के मुताबिक, शुरुआती पुलिस तफ्तीश में यह साफ हो गया है कि लाखों रुपयों के अवैध लेन-देन और दलालों के माध्यम से इन अयोग्य लोगों की संजीवनी क्लीनिकों में नियुक्तियां कराई गई थीं। इसके साथ ही, देश के नामचीन मेडिकल कॉलेजों के नाम पर हुबहू फर्जी डिग्री और फर्जी मेडिकल रजिस्ट्रेशन तैयार करने वाले कुछ मास्टरमाइंड्स और दलालों के नाम भी पुलिस के हाथ लगे हैं। दमोह पुलिस अब साइबर सेल की मदद से इस पूरे आपराधिक नेटवर्क के बैंक खातों और मनी ट्रेल की जांच में जुटी हुई है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि इस मामले में आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों और अन्य फर्जी डॉक्टरों की गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।

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