Nautapa 2026: 25 मई से शुरू होगा नौतपा; रोहिणी का समुद्र में निवास, ज्योतिषाचार्य ने दिए इस बार बंपर बारिश के संकेत

उज्जैन: सनातन हिंदू पंचांग और मौसम विज्ञान के अद्भुत समन्वय के अनुसार, आगामी 25 मई से इस साल के ‘नौतपा’ (Nautapa 2026) की शुरुआत होने जा रही है। यह विशेष समय देश में आने वाली वर्षा ऋतु के संपूर्ण चक्र का सटीक निर्धारण करता है। ज्योतिष के बड़े जानकारों और मेदिनी ज्योतिष के विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार रोहिणी का निवास ‘समुद्र’ के घर होने से यह देश भर में उत्तम वृष्टि (बंपर बारिश) के बेहद शुभ संकेत दे रहा है। शास्त्रों के मुताबिक, वर्षा ऋतु में सुवृष्टि के लिए शुभ लक्षणों की गणना में समय के निवास की भी खगोलीय स्थिति देखी जाती है। इस बार समय का निवास ‘माली’ के घर होने को भी ज्योतिषीय आधार पर देश में अच्छी मानसूनी बारिश और समृद्ध कृषि उत्पादन से जोड़कर देखा जा रहा है।
🌞 सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कहलाएगा नौतपा: ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने मेदिनी ज्योतिष के हवाले से दी जानकारी
उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने इस खगोलीय घटनाक्रम पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि, “मेदिनी ज्योतिष (Mundane Astrology) के सिद्धांतों के अनुसार, पृथ्वी की जलवायु और मौसम में बड़े परिवर्तन का मुख्य कारक साक्षात सूर्य देव को माना गया है। सूर्य जब किसी नक्षत्र विशेष में प्रवेश करता है, तो वह पूरी पृथ्वी के मौसम को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।” पंचांग की सटीक गणना के अनुसार, आगामी 25 मई को सूर्य देव का प्रवेश रोहिणी नक्षत्र में होने जा रहा है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में इस प्रवेश काल को ही आम बोलचाल की भाषा में ‘नौतपा’ कहा जाता है। यद्यपि सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में कुल गोचर काल अधिकतम 14 दिनों का रहता है, लेकिन आगामी बारिश का चक्र निर्मित करने के लिए इसके शुरुआती ‘प्रथम नौ दिन’ सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और निर्णायक माने जाते हैं।
⛈️ नौतपा के पहले 9 दिन क्यों हैं बेहद महत्वपूर्ण?: तेज धूप, आंधी-तूफान और बूंदाबांदी से खुलेगा वर्षा ऋतु के 4 महीनों का राज
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, नौतपा के इन शुरुआती नौ दिनों के भीतर ही यह पूरी तरह निर्धारित हो जाता है कि वर्षा ऋतु के अगले चार महीनों (चातुर्मास) में देश में बारिश की स्थिति कैसी और कितनी रहने वाली है। नवतपा के इन नौ दिनों में प्रकृति में मौसम की अलग-अलग प्रकार की स्थितियां क्रमिक रूप से बनती हैं। इसमें अत्यधिक तेज धूप का तपना, अचानक धूलभरी आंधी और चक्रवाती तूफान का आना, छिटपुट बूंदाबांदी होना, कहीं तेज बारिश तो कहीं कम बारिश होना शामिल है। ज्योतिषियों का कहना है कि इन नौ दिनों के भीतर प्रतिदिन होने वाले मौसम के सूक्ष्म परिवर्तनों और दिशाओं का गहन अध्ययन करके ही देश के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली कुल बारिश की सटीक स्थिति का आसानी से पता लगाया जा सकता है।
💨 वाष्पीकरण (Evaporation) की प्रक्रिया होगी बेहद तेज: जल तत्व के प्रमुख केंद्र समुद्र में रोहिणी के होने से तेजी से बनेंगे बादल
ज्योतिष शास्त्र के प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, देश के किसी भूभाग में अतिवृष्टि (बाढ़), अल्प वृष्टि (सूखा) तथा खंड वृष्टि (रुक-रुक कर बारिश) की सटीक स्थिति का पता लगाने के लिए रोहिणी माता व समय के निवास स्थान की गणना की जाती है। इस बार खगोलीय गणना में रोहिणी का निवास सीधे ‘समुद्र’ में पाया गया है। चूंकि समुद्र संपूर्ण पृथ्वी पर जल तत्व का सबसे प्रमुख और विशाल केंद्र है, इसलिए रोहिणी का निवास समुद्र में होने के प्रभाव से नौतपा के दिनों में सूर्य की कड़क धूप के कारण वाष्पीकरण (Evaporation Process) की प्रक्रिया बहुत तेजी से होगी। इससे वायुमंडल में बड़े पैमाने पर बादलों के निर्माण की प्रक्रिया तेज होगी, जो आगे चलकर देश में समय पर और झमाझम मानसून बारिश कराएगी।
🌾 समय का वाहन ‘चातक’ और निवास ‘माली’ के घर: किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, उत्तम खेती और बंपर पैदावार के प्रबल योग
इस वर्ष नौतपा काल के दौरान समय का निवास माली के घर होना भी सुवृष्टि (समान और अच्छी बारिश) के लिए सर्वोत्तम माना जा रहा है। जैसे एक माली अपने बगीचे के हर पौधे को बड़े प्यार और पर्याप्त पानी से सींचता है, ठीक उसी तरह इस बार प्रकृति पूरे देश को पानी से सराबोर करेगी। इसके साथ ही विशेष ज्योतिषीय संयोग यह भी है कि इस बार समय का मुख्य वाहन ‘चातक’ पक्षी के घर होने से भी समय पर मानसून आने, अच्छी मानसूनी फुहारें बरसने व अन्नदाताओं के लिए उत्तम खेती व बंपर धान-गेहूं पैदावार के प्रबल राजयोग बन रहे हैं। ज्योतिषियों के इस शुभ आकलन से देश के किसानों में खुशी की लहर है।






