ब्रेकिंग
Gariaband Crime News: गरियाबंद में गांजा तस्करी का अनोखा मामला, मां-बेटे को 18 किलो गांजे के साथ पुल... Thane District News: आदिवासी आश्रम स्कूल के छात्र की मौत पर आक्रोश, परिजनों और संगठनों ने किया प्रदर... Durg Police Action: ठाणे के अपार्टमेंट में चल रहा था रेड्डी अन्ना और फेयरप्ले ऐप का खेल, छत्तीसगढ़ प... Balrampur Development News: डिप्टी सीएम अरुण साव ने 157 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण और भ... Balrampur News: विजयनगर स्कूल में मधुमक्खियों के हमले से घायल 12 बच्चों के लिए 3 लाख रुपये की सहायता... Magarlod Police Action: मेघा गांव में पेट्रोल पंप और बाइक फूंकने वाला आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ में हुआ... Dhamtari Extortion Case: नहरनाका चौक पर वाहनों को रोककर पैसे लेने का मामला, खनिज अधिकारी ने दिए जांच... Bilaspur Crime News: गरबा ड्रेस पहनकर सिगरेट पीने और पिस्तौल दिखाने वाली युवतियों समेत 9 आरोपी गिरफ्... Women T20 Series Raipur: रायपुर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का रोमांच, जानिए टिकट दरें, श्रेणियां और प... Mahasamund Crime News: ऑपरेशन निश्चय के तहत महासमुंद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 2.80 करोड़ का गांजा जब्...
मध्यप्रदेश

Dhar Sand Mining: धार के मनावर में नर्मदा किनारे रेत माफिया बेखौफ; कोर्ट की रोक के बावजूद नदी का सीना हो रहा छलनी

मनावर (धार): धार जिले की मनावर तहसील के अंतर्गत मां नर्मदा नदी के पावन तटवर्ती क्षेत्रों में रेत का अवैध खनन एक बार फिर इलाके में गंभीर चिंता और विवाद का बड़ा विषय बन गया है। कड़े प्रशासनिक दावों, जमीनी कार्रवाई और माननीय न्यायालय के स्पष्ट प्रतिबंधात्मक निर्देशों के बावजूद नर्मदा नदी के किनारे बसे गांवों में रेत माफिया लगातार सक्रिय हैं और भारी मशीनों के जरिए नदी के सीने को छलनी कर रहे हैं। तटीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पिछले कई वर्षों से सुनियोजित तरीके से चल रहे इस अवैध काले कारोबार पर प्रशासन द्वारा समय-समय पर दिखावे की कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन कुछ ही दिनों के अंतराल में जमीनी हालात फिर पहले जैसे ही हो जाते हैं।

🚜 इन तटवर्ती गांवों में दिन-रात चल रहा है अवैध रेत का काला खेल: ट्रैक्टर-ट्रालियों से हो रही है धड़ल्ले से सप्लाई

गौरतलब है कि नर्मदा नदी के किनारे बसे प्रमुख ग्राम बड़दा, रतवा, सेमल्दा, गांगली, अछोदा, पुनर्वास, मलनगांव, उरदना और एकलबारा सहित कई अन्य संवेदनशील गांवों में खुलेआम अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है। माफियाओं द्वारा दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रालियों, डंपरों और अन्य प्रतिबंधित आधुनिक साधनों से दिन-रात बिना किसी रॉयल्टी के रेत का अवैध खनन कर उसे धार, इंदौर और आसपास के अन्य शहरी क्षेत्रों में महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रेत माफियाओं के हौसले प्रशासनिक ढील के कारण इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे लगातार होने वाली जन-शिकायतों और जब्ती की कार्रवाई के बावजूद बेखौफ होकर इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहे हैं।

📞 परेशान ग्रामीण ने सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) पर ठोंकी शिकायत: हरकत में आया जिला खनिज विभाग, रतवा में बड़ी दबिश

लगातार हो रहे पर्यावरण विनाश से परेशान होकर हाल ही में एक जागरूक ग्रामीण द्वारा पुख्ता प्रमाणों के साथ सीधे सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) पर इसकी गोपनीय शिकायत दर्ज कराई गई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय से मामला सीधे जिला प्रशासन तक ट्रांसफर होने के बाद धार जिला खनिज विभाग की टीम अचानक हरकत में आई। खनिज अधिकारियों के दल ने स्थानीय पुलिस बल के साथ ग्राम रतवा के नर्मदा तट पर औचक दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान टीम ने मौके से रेत छानने व निकालने वाली एक अवैध पोकलेन मशीन और एक भरी हुई ट्रैक्टर-ट्राली को रंगेहाथ जब्त कर लिया। इस औचक कार्रवाई से आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन करने वाले माफियाओं और बिचौलियों में हड़कंप मच गया और कई लोग दूर से ही अपने वाहन एवं कीमती उपकरण समेटकर भागते नजर आए।

📄 “सिर्फ कागजों और फाइलों तक सीमित रह जाती है पुलिसिया कार्रवाई”: नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर ने भी उठाया था मुद्दा

तटवर्ती क्षेत्र के जागरूक ग्रामीणों ने बताया कि इस गंभीर मुद्दे को कई बार तहसील से लेकर जिला स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उठाया जा चुका है। ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ (NBA) की शीर्ष नेत्री मेधा पाटकर ने भी पूर्व में इस अवैध खनन के संबंध में धार कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जमीनी हकीकत से अवगत कराया था, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण अधिकांश मामलों में ठोस जमीनी कार्रवाई होने के बजाय फाइलें केवल कागजों तक ही सिमटकर रह जाती हैं। परिणाम स्वरूप जैसे ही अफसरों की टीम वापस लौटती है, अवैध खनन करने वालों के हौसले फिर से सातवें आसमान पर पहुंच जाते हैं।

⚖️ जबलपुर हाईकोर्ट के साल 2015 के आदेशों की खुलेआम उड़ रही हैं धज्जियां: डूब प्रभावित क्षेत्रों में भी पर्यावरण को भारी खतरा

नर्मदा बचाओ आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ताओं ने कानूनी दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि माननीय जबलपुर उच्च न्यायालय (MP High Court) ने वर्ष 2015 के अपने एक ऐतिहासिक आदेश में सरदार सरोवर परियोजना के संपूर्ण डूब प्रभावित क्षेत्र (Submergence Zone) में किसी भी प्रकार के रेत खनन पर पूरी तरह से कानूनी रोक लगाई थी। उच्च न्यायालय का स्पष्ट मत था कि डूब प्रभावित क्षेत्रों में खनन से नदी के जलीय पर्यावरण और तटों की भौगोलिक संरचना को अपूरणीय क्षति पहुंचती है। इसके बावजूद कानून को ठेंगा दिखाते हुए मनावर तहसील के कई डूब प्रभावित गांवों में आज भी धड़ल्ले से अवैध खनन जारी है, जिसे रोकने के लिए अब एक बड़े और निरंतर चलने वाले कड़े प्रशासनिक टास्क फोर्स की सख्त जरूरत है।

Related Articles

Back to top button