ब्रेकिंग
हिमाचल से लद्दाख तक रेल नेटवर्क, 1.31 लाख करोड़ की लागत से बनेगा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन लखनऊ ट्रिपल मर्डर की तर्ज पर कानपुर में खूनी संघर्ष, जमीनी विवाद में एक पक्ष ने चार लोगों को मारी गो... Kedartal Trekker Rescue Operation Uttarkashi: उत्तराखंड के केदारताल में लापता ट्रेकरों की तलाश तेज, ... गोरखपुर में बीजेपी की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा, सीएम योगी और नितिन नबीन ने कांग्रेस पर... दरभंगा में सोशल मीडिया पर प्यार और शादी का झांसा देकर इंजीनियर से डेढ़ करोड़ की ठगी, शेयर बाजार में ... दिल्ली के स्कूल में दिल दहला देने वाली घटना, खेलकूद के बाद क्लासरूम में गिरी तीसरी कक्षा की मासूम और... चार साल बाद सेना से नहीं बाहर होंगे 75% अग्निवीर, मोदी कैबिनेट के नए फैसले से युवाओं को मिला बड़ा मौ... न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय तेज गेंदबाजों का शानदार प्रदर्शन, अर्शदीप ... रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की बेटी राहा कपूर करेंगी एक्टिंग की दुनिया में कदम, फिल्म 'रामायण' में नजर ... अमेरिका में ट्रंप की हार के बाद तेहरान में लगा 'We Will Kill Trump' का पोस्टर, नेतन्याहू पर भी कसा त...
देश

West Bengal Politics: क्या है ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’? बागी TMC सांसदों के बीच पुरानी चर्चाओं का दौर तेज

पश्चिम बंगाल: टीएमसी के बागी सांसदों द्वारा नए राजनीतिक मंच से जुड़ने या विलय करने की खबरों के बीच, ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) नाम की एक पार्टी का पुराना नोटिस राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह नोटिस भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के नियमों के तहत अक्टूबर 2022 में जारी किया गया था।

📜 क्या कहता है निर्वाचन आयोग का पुराना नोटिस?

दस्तावेजों के अनुसार, 13 अक्टूबर 2022 को ‘मिलेनियम पोस्ट’ और ‘समीक्षा’ अखबारों में प्रकाशित सार्वजनिक नोटिस में इस नई पार्टी के रजिस्ट्रेशन का प्रस्ताव दिया गया था। इस नोटिस के जरिए आम जनता से किसी भी प्रकार की आपत्ति आमंत्रित की गई थी। पार्टी का पंजीकृत कार्यालय हावड़ा (पश्चिम बंगाल) के बांकरा क्षेत्र में दर्शाया गया था और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि 13 दिसंबर 2022 निर्धारित की गई थी।

🔄 टीएमसी बगावत और बढ़ती अटकलें

हाल ही में टीएमसी के बागी सांसदों के दिल्ली में सक्रिय होने और एनडीए के साथ गठबंधन के कयासों के बाद, इस पुरानी राजनीतिक इकाई का नाम फिर से सामने आया है। विश्लेषकों का मानना है कि बागी सांसदों के लिए एक नया मंच तलाशना कानूनी रूप से एक सुरक्षित कदम हो सकता है, लेकिन फिलहाल इस बारे में किसी भी पक्ष से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

⚖️ भविष्य पर क्या होगा असर?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कोई प्रमुख नेता या सांसद भविष्य में इस पार्टी से जुड़ता है, तो यह पश्चिम बंगाल के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है। हालांकि, अभी यह केवल अटकलों का दौर है। आधिकारिक घोषणा और संबंधित पक्षों के रुख के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्या वाकई ये बागी सांसद ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी’ को अपनी नई राजनीतिक पहचान बनाएंगे।

Related Articles

Back to top button