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मध्यप्रदेश

MP High Court News: राम राजा मंदिर दान हेराफेरी मामला; मुन्नालाल तिवारी को बड़ी राहत, अब मामले में नई बहस शुरू

ओरछा/निवाड़ी: बुंदेलखंड की दूसरी अयोध्या कहे जाने वाले ओरछा के राम राजा मंदिर में दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के बहुचर्चित मामले में हाईकोर्ट, जबलपुर ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन मंदिर लिपिक मुन्नालाल तिवारी के खिलाफ 2017 में दर्ज की गई एफआईआर को निरस्त कर दिया है। यह मामला 9 वर्षों से प्रशासनिक और कानूनी दांव-पेच में उलझा हुआ था।

📂 क्या था पूरा मामला और 16 बिंदुओं की जांच?

वर्ष 2017 में मंदिर की दानराशि और आभूषणों में गड़बड़ी की शिकायत तत्कालीन कलेक्टर प्रियंका दास से की गई थी। जतारा एसडीएम द्वारा 16 बिंदुओं पर की गई जांच में वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख था, जिसके आधार पर लिपिक मुन्नालाल तिवारी को बर्खास्त कर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। हालांकि, तिवारी का पक्ष यह रहा कि वे केवल लिपिकीय कार्य करते थे और मुख्य वित्तीय निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लिए जाते थे। वर्ष 2019 में लोकायुक्त की जांच में भी उन पर लगे आरोप निराधार पाए गए थे।

🔥 राजनीतिक रंग में रंगा मामला, SIT जांच की मांग

हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ओरछा मामले में एसआईटी (SIT) जांच की मांग उठाई है। पटवारी का कहना है कि 9 साल बीत जाने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि मंदिर की राशि में गड़बड़ी के लिए वास्तविक जिम्मेदार कौन है। वहीं, बीजेपी प्रवक्ता विवेक गुप्ता ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से देख रही है।

❓ 9 साल बाद भी जांच के नतीजे क्यों हैं शून्य?

इस मामले ने प्रशासन और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता रामनरेश दास ने आरोप लगाया है कि पुलिस-प्रशासन ने शुरुआत से ही मामले की लीपापोती की। अब हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर निरस्त होने के बाद यह सवाल और भी प्रासंगिक हो गया है कि यदि अनियमितताएं हुई थीं, तो उनके असली जिम्मेदार कौन हैं और इतने लंबे समय तक जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक क्यों नहीं पहुंच सकी?

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