ब्रेकिंग
Panna Sidhi Train Service: पश्चिम मध्य रेल ने भेजा प्रस्ताव, विंध्य के इन दो जिलों में जल्द शुरू होग... Balod News: कबीरधाम में भारतीय किसान संघ का उग्र प्रदर्शन, 23 सूत्रीय मांगों को लेकर ट्रैक्टरों से क... Chhattisgarh Industrial Fire: भिलाई की फैक्ट्री में कैमिकल ड्रम फटने से लगी आग, बाल-बाल बचे मजदूर Raipur News: शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम में भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 सीरीज, प्रशासन ने पूरी की... Chhattisgarh News: तेलीबांधा चौक के नाम परिवर्तन को लेकर सीएम साय का बयान, 'सेवा ज्योति संकल्प' के त... Bastar Development News: सहकारिता मॉडल पर चर्चा के लिए बस्तर पहुंचे विभिन्न राज्यों के सहकारिता सचिव... Nana Patekar Demise: पद्म श्री पुरस्कार विजेता मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन... Kisan Andolan Chhattisgarh: धान के बढ़े दाम और बकाया भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने निकाली ट्रैक्... Dantewada News: दंतेश्वरी मंदिर में नवरात्रि दुकान आवंटन को लेकर व्यापारियों का विरोध, सड़क पर जगह म... Chhattisgarh Crime News: कमिश्नरेट पुलिस ने जब्त किया 1 क्विंटल 27 किलो गांजा, एनडीपीएस एक्ट के तहत ...
धार्मिक

Vat Purnima 2026: वट पूर्णिमा कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और अखंड सौभाग्य का महत्व

परिचय: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी दिन ‘वट पूर्णिमा’ या ‘वट सावित्री व्रत’ पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए है, जो अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ यह व्रत रखती हैं। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में यह शुभ तिथि 29 जून को पड़ रही है।

📜 वट पूर्णिमा का पौराणिक महत्व

यह व्रत देवी सावित्री के उस दृढ़ संकल्प का प्रतीक है, जिसके बल पर उन्होंने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। तब से ही यह परंपरा चली आ रही है कि सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखकर देवी सावित्री की भांति अपने पति की सुरक्षा और समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।

🌿 बरगद के वृक्ष की पूजा का कारण

धार्मिक ग्रंथों में बरगद (वट) के वृक्ष को दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि इस वृक्ष में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। इसलिए, पूजा के दौरान बरगद के वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटकर महिलाएं अपने सुखी वैवाहिक जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं।

🪔 पूजन विधि और नियम

  • संकल्प: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।

  • पूजन सामग्री: बरगद के वृक्ष के नीचे जल, रोली, अक्षत, फूल, फल और प्रसाद अर्पित करें।

  • परिक्रमा: वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा करें और सावित्री-सत्यवान की कथा का पाठ या श्रवण करें।

  • आरती: अंत में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और वट वृक्ष की आरती कर परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करें।

✨ वट पूर्णिमा पर क्या करें?

व्रत के दिन मन में सात्विक विचार रखें और घर में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखें। पूजा के पश्चात अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को दान अवश्य करें। सकारात्मकता और श्रद्धा के साथ किया गया यह व्रत दांपत्य जीवन में प्रेम और विश्वास को और मजबूत बनाता है।

Related Articles

Back to top button