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मध्यप्रदेश

MP News Student Fast Track Court: सीएम मोहन यादव के ऐलान के बाद एक्शन में हाईकोर्ट; छात्रों के मामलों के लिए 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित, नोटिफिकेशन जारी

भोपाल: दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के बाद मध्य प्रदेश में छात्रों से जुड़े मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाएगी। केंद्र सरकार के बाद अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी प्रदेश में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया था, जिसके बाद देर शाम मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन कर दिया है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अलावा जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर में ये फास्ट ट्रैक कोर्ट होंगी। ये कोर्ट्स छात्रों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगी, जिससे मामलों में जल्द से जल्द न्याय दिलाया जा सके।

📜 हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिफिकेशन, 4 प्रमुख शहरों में नियुक्त किए गए सेशन जज

मध्य प्रदेश में पेपर लीक और परीक्षा गड़बड़ी पर अब त्वरित सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के नोटिफिकेशन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में फास्ट ट्रैक कोर्ट और उनके जजों की नियुक्ति कर दी गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। भोपाल में सेशन जज प्रवीण पटेल, इंदौर में सेशन जज शुभदा सिंह, जबलपुर में सेशन जज आनंद कुमार सेहलाम और ग्वालियर में सेशन जज विशाल अखंड की फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित की गई है।

⚖️ क्यों पड़ी फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत? पीएम मोदी की अपील के बाद सीएम मोहन यादव का बड़ा फैसला

नीट पेपर लीक को लेकर भड़के छात्र आंदोलन के बाद केंद्र की मोदी सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 में संशोधन करने जा रही है। इसके साथ ही पेपर लीक जैसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का प्रावधान जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों से भी ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की अपेक्षा की थी। पीएम की अपील के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि युवाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में ही की जाएगी।

🏛️ क्या होती है फास्ट ट्रैक कोर्ट और कब शुरू हुआ था इसका कॉन्सेप्ट?

आपराधिक मामलों में पुलिस कार्रवाई के बाद उसकी सुनवाई कोर्ट में शुरू होती है, हालांकि अदालतों में बहुत ज्यादा केस लंबित होने से मामलों की सुनवाई पूरी होने में बहुत वक्त लग जाता है। यही वजह है कि गंभीर और संवेदनशील मामलों की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए वर्ष 2000 में सबसे पहले फास्ट ट्रैक कोर्ट का कॉन्सेप्ट आया था। देश के 11वें वित्त आयोग ने देशभर में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने का सुझाव रखा था। इसके बाद इस दिशा में काम शुरू हुआ और सभी राज्यों को जल्द सुनवाई और मामलों में त्वरित न्याय दिलाने के लिए हाईकोर्ट के निर्देशन में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

NEET LIKE CASES HEARING MP HIGHCOURT FAST TRACK COURTS

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