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हरियाणा

पानीपत में इलाज में बड़ी लापरवाही! पैर के फ्रैक्चर के इलाज में दिल में डाला स्टेंट, महिला की मौत पर FIR दर्ज

पानीपत (हरियाणा): पानीपत के एक निजी अस्पताल में पैर के फ्रैक्चर का इलाज कराने आई महिला की मौत के बाद चिकित्सीय लापरवाही और धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। मृतका के परिजनों का सनसनीखेज आरोप है कि सड़क हादसे में महिला का पैर टूट गया था, जिसके इलाज के लिए उसे भर्ती कराया गया था।

हालांकि, डॉक्टरों ने पैर का ऑपरेशन करने के बजाय परिजनों की सहमति के बिना उसके दिल में स्टेंट डाल दिया। परिजनों का दावा है कि यह पूरी जानलेवा प्रक्रिया केवल केंद्र सरकार की ‘आयुष्मान भारत योजना’ के तहत सरकारी फंड क्लेम करने के उद्देश्य से की गई थी। परिजनों की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित अस्पताल व डॉक्टरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

💔 पैर के इलाज के नाम पर बुलाया, बिना सहमति हार्ट में डाल दिया स्टेंट: मृतका का बेटा

मामले की जानकारी देते हुए मृतका के बेटे कुलदीप सिंह ने बताया, “मेरी मां का गाजियाबाद में सड़क हादसा हुआ था, जिसमें उनके पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया था। एक परिचित के जरिए पानीपत के इस निजी अस्पताल के डॉक्टर से संपर्क हुआ, जिन्होंने बेहतर इलाज का भरोसा देकर हमें बुलाया था। हम मां के पैर का इलाज कराने आए थे, लेकिन हमारी बिना किसी लिखित या मौखिक सहमति के उनके दिल में स्टेंट डाल दिया गया। गाजियाबाद की पुरानी मेडिकल रिपोर्ट में उन्हें दिल की कोई बीमारी नहीं थी।”

💳 आयुष्मान कार्ड के दुरुपयोग और फर्जी हस्ताक्षर कराने का आरोप

वहीं, मृतका की रिश्तेदार दुर्गा ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने शुरुआत में पैर का ऑपरेशन न होने पर ₹3,000 लेने की बात कही थी, लेकिन बाद में पैर का ऑपरेशन करने से साफ इनकार कर दिया।

जब परिजनों ने आयुष्मान कार्ड से इलाज करने की बात कही, तो अस्पताल ने कथित तौर पर महिला को जबरन हृदय रोगी (Heart Patient) दिखाकर योजना के तहत फाइल तैयार कर ली। इसके लिए फर्जी हस्ताक्षर कराए गए और परिजनों की सहमति के बिना कैथ लैब में ले जाकर स्टेंट डाल दिया गया, जिससे मरीज की जान चली गई।

⚠️ ‘मौत के बाद अस्पताल ने बनाया सेटलमेंट का दबाव’, परिजनों ने समझौता करने से किया इनकार

मृतका के बेटे कुलदीप सिंह ने आगे आरोप लगाया कि हार्ट प्रोसीजर पूरा होने के कुछ ही देर बाद अस्पताल ने उन्हें अचानक महिला की मौत की सूचना दी। मौत के तुरंत बाद ही अस्पताल से जुड़े कुछ लोगों ने मामले को दबाने और पैसों के दम पर समझौते का भारी दबाव बनाया। कुलदीप ने कहा, “मां की मौत के बाद हम पर सेटलमेंट करने का दबाव बनाया गया, लेकिन हमने किसी भी तरह का समझौता करने से साफ इनकार कर दिया और सीधे पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई।”

📱 अस्पताल में भर्ती होने के बाद सामान्य रूप से बात कर रही थीं महिला: रिश्तेदार

मृतका की रिश्तेदार दुर्गा देवी ने कहा, “अस्पताल में भर्ती होने के बाद महिला फोन पर हमसे बिल्कुल सामान्य रूप से बात कर रही थीं और केवल पैर की चोट का जिक्र कर रही थीं। उन्हें जीवन में कभी भी दिल की बीमारी नहीं रही। अगर डॉक्टरों द्वारा इलाज में यह घोर लापरवाही नहीं बरती जाती, तो शायद आज वह हमारे बीच जीवित होतीं।”

🩺 मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर थी, परिजनों की सहमति से ही हुआ इलाज: अस्पताल के डायरेक्टर

दूसरी ओर, आरोपों पर सफाई देते हुए अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अजीत श्रीवास्तव ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा, “प्रारंभिक जांच के दौरान मरीज के हृदय में बेहद गंभीर समस्या सामने आई थी। ऐसी स्थिति में पैर का ऑपरेशन करना मरीज की जान के लिए सुरक्षित नहीं था। मरीज और उनके परिजनों को पूरी चिकित्सीय स्थिति विस्तार से समझाई गई थी। उनकी पूर्ण सहमति के बाद ही आयुष्मान भारत योजना के तहत पोर्टल पर प्रक्रिया शुरू की गई और सरकारी मंजूरी मिलने के बाद ही कैथ लैब में स्टेंट डाला गया।”

📹 हमारे पास CCTV फुटेज और सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं: अस्पताल सीईओ

अस्पताल की सीईओ सपना भंबरी ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “आयुष्मान भारत योजना के तहत बिना आवश्यक वैध दस्तावेजों और रजिस्ट्रेशन के कोई भी केस तैयार नहीं किया जा सकता। हमारे पास अस्पताल परिसर के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और सभी हस्ताक्षरित दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें परिजन स्वयं रजिस्ट्रेशन और फॉर्म पर हस्ताक्षर करते दिखाई दे रहे हैं। उल्टा परिजनों ने ही आर्थिक सहायता और सेटलमेंट की अनुचित मांग की थी, जिसे अस्पताल ने स्वीकार नहीं किया। मरीज से कोई अतिरिक्त राशि नहीं ली गई है।”

⚖️ BNS की धारा 106, 318(4) और 351(2) के तहत मामला दर्ज, जांच जारी: DSP सुरेश कुमार

इस पूरे मामले पर आधिकारिक मीडिया बाइट देते हुए डीएसपी सुरेश कुमार ने बताया, “शिकायतकर्ता कुलदीप सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उन्होंने 24 जुलाई को अपनी माता गुड्डी देवी को पैर में फ्रैक्चर होने के कारण निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। आरोप है कि इलाज के दौरान 25 जुलाई को डॉक्टरों ने परिजनों की सहमति (Consent) के बिना मां के दिल में स्टेंट डाल दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।”

डीएसपी ने बताया कि शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित निजी अस्पताल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 (लापरवाही से मौत), 318(4) (धोखाधड़ी) और 351(2) (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले की गहन जांच जारी है और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट व साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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