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महाराष्ट्र

मुंबई लोकल में भक्ति का अनोखा रंग: चलती ट्रेन में 21 सालों से जारी है भजन, 56 भोग लगाकर मनाया गया जश्न

मुंबई (महाराष्ट्र): मुंबई की लोकल ट्रेनों को शहर की लाइफलाइन (आजीवन रेखा) कहा जाता है।  अधिकांश लोगों के लिए लोकल ट्रेन समय पर कार्यालय पहुंचने का जरिया है, तो किसी के लिए यह दैनिक थकान और आपाधापी भरा सफर है। किंतु, इन सबके मध्य मुंबई लोकल में कुछ ऐसे भी यात्री हैं, जो हर दिन भक्ति, श्रद्धा और मानवीय जुड़ाव की एक अलौकिक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। पश्चिम रेलवे की भायंदर से दादर जाने वाली सुबह 10:20 बजे की लोकल ट्रेन हाल ही में ऐसी ही एक अत्यंत मनमोहक और अनूठी पहल की गवाह बनी।

🪔 चलती ट्रेन में लगाया गया 56 भोग, यात्रियों को गुलाब का फूल और प्रसाद देकर किया स्वागत

भायंदर से दादर जाने वाली सुबह 10:20 बजे की लोकल ट्रेन के डिब्बे में इस दिन एक अलौकिक और हर्षोल्लास भरा माहौल देखने को मिला।

दरअसल, इस ट्रेन में नियमित यात्रा करने वाले ‘ओमकार भजन मंडल’ ने अपनी यात्रा व भजन परंपरा के सफल 21 वर्ष पूर्ण कर लिए। इस ऐतिहासिक अवसर पर चलती ट्रेन में ही देवी मां को 56 प्रकार के भोग अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके उपरांत साथी यात्रियों का स्वागत गुलाब के ताजे फूल बांटकर किया गया। इस अनूठे आयोजन का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हो रहा है और लोग इस अनूठी परंपरा की जमकर सराहना कर रहे हैं।

🚩 वर्ष 2006 में हुई थी इस भजन मंडली की शुरुआत, भजन से मिले पैसों से करते हैं समाज सेवा

इस अद्भुत भजन मंडली की स्थापना 6 अगस्त 2006 को हुई थी।

तभी से इस मंडली के निष्ठावान सदस्य प्रतिदिन सुबह 10:20 बजे भायंदर से छूटने वाली इस लोकल ट्रेन में नियमित रूप से यात्रा करते आ रहे हैं। सफर के दौरान ढोलक-मंजीरों के साथ निरंतर भजन, कीर्तन और आरती गाते हुए यात्रा पूरी की जाती है। कुछ समय के लिए आम यात्रियों से भरा यह कोच किसी भक्ति धाम में परिवर्तित हो जाता है। विशेष बात यह है कि यात्रा के दौरान सह-यात्रियों से जो भी अंशदान या चढ़ावा प्राप्त होता है, उसका उपयोग मंडली द्वारा जरूरतमंदों की सहायता और विभिन्न सामाजिक कार्यों में किया जाता है।

🍰 घर से प्रसाद लाए सभी सदस्य, चलती लोकल में कटा केक और बांटी गईं खुशियां

भजन मंडली के 21 वर्ष पूर्ण होने का यह शुभ अवसर अत्यंत श्रद्धा, उमंग और उत्साह के साथ मनाया गया।

इस अवसर की सबसे मुख्य विशेषता यह रही कि मंडली का प्रत्येक सदस्य अपने घर से खुद तैयार कर कुछ न कुछ विशेष प्रसाद लेकर आया था। चलती ट्रेन के भीतर ही देवी मां का दरबार सजाया गया, भोग लगाया गया और मंगल आरती उतारी गई। पारंपरिक पूजन के साथ-साथ सदस्यों ने केक काटकर अपनी खुशियों को साझा किया, जिसमें भक्ति के साथ-साथ आधुनिकता का सुंदर संगम दिखाई दिया। ट्रेन में उपस्थित अन्य सह-यात्रियों ने भी इस पावन उत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लिया।

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