मध्य प्रदेश के धार का प्रसिद्ध ‘बाग प्रिंट’ पहुंचा राष्ट्रपति भवन, ‘एट होम’ समारोह की बढ़ाएगा शोभा

धार (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और मालवा अंचल के ऐतिहासिक धार जिले के पारंपरिक हस्तशिल्प ‘बाग प्रिंट’ (Bagh Print) ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक भवन यानी राष्ट्रपति भवन तक का गौरवशाली सफर तय कर लिया है।
स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के पावन अवसर पर राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मेजबानी में भव्य ‘एट होम’ (At Home Reception) समारोह आयोजित किया जा रहा है। इस उच्चस्तरीय आयोजन में देश और दुनिया भर से लगभग 650 अतिविशिष्ट अतिथि (VVIPs) सम्मिलित होंगे। इस गरिमामयी समारोह के दौरान सभी विशेष अतिथियों की मेजों पर धार के पारंपरिक हस्तशिल्प ‘बाग प्रिंट’ से सुसज्जित विशेष कवर बिछाए जाएंगे।
🪡 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बिलाल खत्री और भाइयों ने तैयार किए विशेष कवर, निमंत्रण पत्र पर भी मिली जगह
यह मध्य प्रदेश और संपूर्ण हस्तशिल्प जगत के लिए अत्यंत गर्व और हर्ष का विषय है कि धार के बाग प्रिंट को राष्ट्रीय पटल पर यह शीर्ष सम्मान प्राप्त हुआ है।
इसके अतिरिक्त, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आमंत्रित विशिष्ट अतिथियों को प्रेषित किए गए आधिकारिक निमंत्रण पत्रों (Invitation Cards) के कवर पृष्ठ पर भी बाग प्रिंट की पारंपरिक और मनमोहक डिजाइन को विशेष स्थान दिया गया है। इन विशेष राउंड कवर्स को अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री तथा उनके अनुज काजिम खत्री एवं अब्दुल करीम खत्री ने अपनी कुशल कारीगरी से तैयार किया है।
🎨 36×36 राउंड साइज कवर्स पर प्राचीन गुफाएं, ताजमहल और आदिवासी संस्कृति का अद्भुत संगम
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर शिल्पकार बिलाल खत्री ने भावुक होते हुए कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सदियों पुरानी बाग प्रिंट परंपरा और इसे जीवित रखने वाले प्रत्येक शिल्पकार के श्रम व समर्पण का प्रतिफल है।
उन्होंने बताया कि इस विशेष आयोजन के लिए 36×36 इंच राउंड साइज के टेबल कवर्स तैयार किए गए हैं। इन कवर्स पर धार की ऐतिहासिक बाग गुफाओं, प्राकृतिक फूलों, मूंगफली के रूपांकनों तथा ताजमहल व लाल किले की बारीक स्थापत्य नक्काशी को पारंपरिक शीशम के लकड़ी के ठप्पों (Wooden Blocks) के जरिए प्राकृतिक रंगों से उकेरा गया है, जिसमें मालवा की समृद्ध आदिवासी कला और लोक संस्कृति की स्पष्ट झलक मिलती है।
🏛️ 2011 में भी राष्ट्रपति भवन जा चुके हैं शिल्पकार बिलाल खत्री, विरासत को सहेजने का मिला सम्मान
उल्लेखनीय है कि मोहम्मद बिलाल खत्री का नाम भारतीय हस्तशिल्प और टेक्सटाइल आर्ट के क्षेत्र में देश-विदेश में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है।
पर्यावरण-अनुकूल प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग की इस प्राचीन विधा को सहेजने के लिए उनके परिवार को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। इससे पूर्व वर्ष 2011 में भी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मोहम्मद बिलाल खत्री अपने पिता ‘शिल्प गुरु’ स्वर्गीय मोहम्मद यूसुफ खत्री के साथ राष्ट्रपति भवन के विशेष आमंत्रण पर गए थे, जहाँ उन्होंने तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति के साथ स्वल्पाहार (ब्रेकफास्ट) किया था। अब एक बार फिर उनकी बनाई कलाकृतियां राष्ट्रपति भवन की आभा में चार चांद लगाएंगी।